46 परिवार पानी के लिए भटक रहे, प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर
बरसात के दौरान गंदा पानी पीने से जलजनित रोग फैलने का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। पट्टा के तहत चढियार पंचायत के चार गांव के लोगों को पिछले एक सप्ताह पेयजल की किल्लत झेलनी पड़ रही है। लोगों को प्राकृतिक जल स्रोतों का पानी पीना पड़ रहा है जिससे यहां पर जल जनित रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। चढियार पंचायत के गुरदापुरा, खरोटा, थड़ व कुकड़ा पानी गांवों को जलशक्ति विभाग ने कुल्हाड़ीवाला से उठाऊ पेयजल योजना से जोड़ रखा है। योजना का स्टोर टैंक गुरदासपुर में बना हुआ है। योजना की पाइप लाइन टूटने से पानी नहीं आ रहा है। जिससे लोगों को बावड़ी का पानी पीना पड़ रहा है।
पूर्व प्रधान प्रेम चंद ठाकुर, अशोक ठाकुर, ओम प्रकाश, बलदेव ठाकुर, विजय कुमार, केशव, सुरेंद्र, विनोद व गुरदेव आदि ने बताया कि गुरदासपुर, खरोटा, थड़ व कुकड़ापानी में पिछले एक सप्ताह से जलशक्ति विभाग द्वारा पेयजलापूर्ति नहीं की गई जिस कारण चार गांव के 46 परिवार बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। लोग प्राचीन बावड़ियों से पानी ढो रहे हैं। उधर, विभाग के अधिशासी अभियंता राहुल अबरोल ने बताया कि पाइप लाइन को ठीक करने का कार्य जारी है। जल्द ही इसे रिपेयर कर दिया जाएगा।
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कुकड़ापानी थड़ में अभी तक नलकों में पानी नहीं
चढियार पंचायत के कुकड़ा पानी व थड़ गांव अभी तक नहीं नलके नही लग पाए हैं। इन दोनों गांव को पाइप लाइन व स्टोर टैंक बना दिया गया है। लेकिन अभी पानी नहीं छोड़ा गया है। उप प्रधान मुकेश कुमार, वार्ड पंच विजय कुमार, पूर्व वार्ड पंच कली राम, श्याम लाल, टेक चंद, मोहन सिंह, नंद लाल, अमर सिंह, चेत राम, राम सिंह व बलविंदर ने बताया कि आजादी के 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी थड़ व कुकड़ापानी में रह रहे 45 परिवारों को अभी तक जलशक्ति विभाग द्वारा नल से जल उपलब्ध नहीं करवाया गया है। उन्होंने बताया कि हालांकि 3 वर्ष पूर्व कैंथा चढियार स्कीम से गांव तक पाइप लाइन बिछाई गई थी तथा चढियार के नीचे जंगल में भंडारण टैंक भी बनाया गया है परंतु अभी तक विभाग ने न तो नल लगाए और न ही पेयजल आपूर्ति नसीब नहीं हुई है। इस स्कीम से कुकड़ापानी, थड़ व जुमलापुर को आपूर्ति की जानी है। गांव के लोग अभी तक भी पारंपरिक जल स्रोतों बावड़ी व खड्ड नाले का पानी पीने को मजबूर हैं।