डॉ. परमार जयंती पर भाषा संस्कृति विभाग ने किया कवि सम्मेलन
नौणी विवि के कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल रहे कार्यक्रम में मुख्यातिथि
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से डॉ. यशवंत सिंह परमार जयंती के अवसर पर शोध पत्र प्रस्तुति परिचर्चा और कवि सम्मेलन हुआ। शुभारंभ मुख्यातिथि नौणी विवि के कुलपति डॉ. राजेश्वर सिंह चंदेल ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नौणी विवि डॉ. यशवंत सिंह परमार की देन है। देश में 76 कृषि विवि हैं जिसमें से यशवंत सिंह परमार वानिकी एवं कृषि विवि नौणी का 17वां स्थान है। ये हम सभी के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में हमें भी संस्कारों से जुड़े रहना चाहिए। उसके बाद डॉ. शंकर वशिष्ठ में ने डॉ. यशवंत परमार की प्रशासकीय एवं सांस्कृतिक चेतना विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन कौमुदी ढल ने हिमाचल निर्माता कहलाया था वो वीर समझता था हर दिल की पीर, सौरव भट्ट ने धरती का स्वर्ग हिमाचल प्रदेश तुम्हारी सुंदरता है अद्वितीय विशेष, रोशन जसवाल ने जिंदगी में पेंचों गम डाल लिए हैं, यह कैसे अजब रिश्ते पाल लिए हैं प्रस्तुत की। इसके अलावा प्रकाश शर्मा, ध्यानचंद सिंह चौहान, मदन हिमाचली, डॉ शंकर वासिष्ठ, अमित घोटा, अंजलि, यामिनी ठाकुर, आशीम गुप्ता, शिवांजना, चेतन वर्मा, प्रमोद कुमार हर्ष, अर्चना पंत, डॉ नरेंद्र शर्मा, अतुल कुमार अपनी कविताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में लगभग 40 कवियों ने भाग लिया।
डॉ. प्रेम लाल गौतम ने संचालन किया। अंत में जिला भाषा अधिकारी ममता वर्मा द्वारा सभी कवियों, लेखकों और दर्शकों का कार्यक्रम आने का धन्यवाद किया। इस दौरान नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ संजीव चौहान, डॉ इंद्रदेव, डॉ मनीष शर्मा, डॉ सीएल ठाकुर, डॉ केके रैना, डॉ एचपी सांख्यान, नरेंद्र चौहान, ध्यानचंद, इंजीनियर बिशन दास उपस्थित रहे।