कुनिहार में आयोजित श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा के दौरान मौजूद भक्तगण। स्रोत : आयोजक
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तहत तुलसी कुटीर आनंद आश्रम में चल रहा सात दिवसीय संत सम्मेलन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। तुलसी कुटीर आनंद आश्रम कुनिहार में आयोजित सात दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं संत सम्मेलन के तहत श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा का आयोजन किया गया। कथा व्यास आचार्य भगत राम नड्डा ने श्रद्धालुओं को पांचवें ज्योतिर्लिंग श्री वैद्यनाथ तथा तीसरे ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर की महिमा का भावपूर्ण वर्णन सुनाया। कथा व्यास ने बताया कि लंकापति रावण की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसके कटे सिरों का वैद्य की तरह उपचार किया, जिससे वे वैद्यनाथ कहलाए। इसके बाद गणेश जी द्वारा शिवलिंग भूमि पर स्थापित करने से वैद्यनाथ धाम की स्थापना हुई। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि कैसे भगवान शिव ने अत्याचारी राक्षस दूषण का संहार कर धर्म की रक्षा की। भस्म आरती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने इसे जीवन की नश्वरता का संदेश बताया। अंत में आचार्य जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि सच्चे मन से शिव आराधना करने वालों को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। समापन पर पूरा आश्रम हर-हर महादेव के जयघोषों से गूंज उठा।