संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बद्दी उपमंडल के माजरू में चल रही श्रीमद्भागवत पुराण कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म दिवस मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा।कथा में व्यास पंडित प्रकाश चंद गर्गाचार्य ने श्रीकृष्ण के जन्म की पावन गाथा सुनाई। उन्होंने कहा कि राजा कंस ने अपनी बहन देवकी के विवाह के बाद आकाशवाणी सुनी कि उनकी आठवीं संतान उसका वध करेगी। भयभीत कंस ने वासुदेव-देवकी को जेल में डाल दिया और उनके सात पुत्रों को मार डाला। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आधी रात में वासुदेव और देवकी की आठवीं संतान के रूप में कारागार में कृष्ण का जन्म हुआ। जन्म के समय कारागार के द्वार अपने आप खुल गए और पहरेदार सो गए। वासुदेव ने शिशु कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार की, जहां शेषनाग ने बारिश से रक्षा की। कृष्ण को नंदजी के घर गोकुल में छोड़ा गया और यशोदा की नवजात कन्या को लेकर मथुरा लौट आए। कंस ने जब उस कन्या को मारना चाहा, तो वह योगमाया के रूप में आकाश में उड़ गई और कंस को चेतावनी दी कि उसका काल पृथ्वी पर जन्म ले चुका है, जो उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। कंस ने नंद गांव में सभी बच्चों को उठाने का आदेश दिया, लेकिन भगवान कृष्ण सुरक्षित रहे।