मार्च से मई तक देव कारिंदे करेंगे दाड़लाघाट क्षेत्र की जात्रा
सोलन, शिमला, बिलासपुर सहित मंडी में भी होती विशेष पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। दाड़लाघाट क्षेत्र के आराध्य बाडुबाड़ा देव की जात्रा रविवार को शुरू होगी। बाडुबाड़ा देव का प्रवास डेढ़ महीने तक लोगों के घरों में उनकी मन्नतें पूर्ण करने के लिए होता है। यह देव जात्रा मार्च से शुरू होकर मई तक रहेगी। बाडुबाड़ा देव के कारिंदे अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार सोलन, शिमला, बिलासपुर सहित मंडी में अपने देव की जात्रा करेंगे। सोलन जिला और अर्की सहित आसपास के क्षेत्र में देवता को प्रमुख रूप से पूजा जाता है। देवता का प्रमुख मूल स्थान मांगल के मंझयाटल धार के पूर्वी किनारे की ऊंची चोटी पर स्थित है। जबकि इसकी अन्य पूजाएं और रथ अर्की के दाड़लाघाट और मंडी सुकेत के नालनी बटवाड़ा व अन्य क्षेत्रों में स्थापित है। यह रथ चक्रधारी देव है और फाल्गुन मास के पश्चात वैशाख तक इस देव की जात्रा का आयोजन किया जाता है। एक किंवदंती के अनुसार बाडुबाड़ा देव सुकेत के निर्माता पराक्रमी वीरसेन है जिन्होंने आठवीं सदी में सुकेत की भी स्थापना की थी, इसकी राजधानी पांगणा मंडी में थी । इस वीर योद्धा ने चंबा सुकेत कल्लु, मंडी क्षेत्रों को जीता था। हिस्ट्री ऑफ हिल स्टेट शिमला बाघल हुचीसन के अनुसार इस योद्धा ने कई किले जीते थे। इसमें श्रीगड़, नारायणगढ़, रघुपुर, जज माधोपुर बगा कोट, मनाली, चंजयला, रायसन आदि शामिल है । इन किलों के स्वामी इनके अधीन हुए तथा अनेक लोक देवों के रूप में प्रतिष्ठित हुए वीरसेन के गीत घर-घर गाए जाते है। मांगल क्षेत्र के पार सतलुज की तलहटी बाडु में इसका ऐतिहासिक मंदिर होने के कारण ही इसे बाडु बाड़ा का नाम दिया गया। बाडुबाड़ा देव कमेटी के सचिव श्याम चौधरी ने बताया कि दाड़लाघाट में देवता का भव्य मंदिर बनाया गया है।