बोले-कई बार संबंधित विभागों को सौंपे ज्ञापन, नहीं निकला समाधान
पुलिस पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन ने चेताया, चुनाव में होंगे गंभीर परिणाम
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। पुलिस पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की सरकारें मौजूदा आर्थिक हालात के लिए जिम्मेदार हैं। नीतिगत असंतुलन और आपसी राजनीतिक खींचतान का सीधा खामियाजा पेंशनरों को भुगतना पड़ रहा है। एसोसिएशन के संयोजक एवं वरिष्ठ मुख्य सलाहकार धनीराम तनवर सहित कार्यकारिणी सदस्यों श्यामलाल ठाकुर, सतपाल शर्मा, नेकीराम, पुष्पा सूद, चमन लाल, वेद ठाकुर, जसवीर सिंह, निर्मल ठाकुर, दीप राम ठाकुर, नागेंद्र ठाकुर, प्रेम कंवर, रतिराम शर्मा और इंदर सिंह ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार डगमगाती जा रही है, लेकिन सबसे अधिक असर उस वर्ग पर पड़ रहा है जिसने वर्षों तक सरकारी सेवाओं में अपना योगदान दिया है।
बताया कि बड़ी संख्या में पेंशनरों के मेडिकल बिल वर्षों से लंबित पड़े हैं। कई बार संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से पूर्व में एक माह के भीतर लंबित मेडिकल बिलों के निपटारे की घोषणा की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। इससे बुजुर्ग पेंशनरों में असंतोष है।
एसोसिएशन ने कहा कि महंगाई भत्ता (डीए) और वेतन एरियर का भुगतान भी करीब तीन वर्षों से अटका हुआ है। महंगाई के दौर में यह देरी पेंशनरों की आर्थिक रीढ़ तोड़ रही है। मेडिकल बिलों का भुगतान न होने के कारण वे समय पर इलाज नहीं करवा पा रहे, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार की ओर से आरडीजी और जीएसटी के हिस्से का भुगतान समय पर न किए जाने व राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी के कारण वित्तीय संकट और गहरा गया है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त हैं, जबकि पेंशनरों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
पेंशनर संघ ने कहा कि एक ओर सरकार सलाहकारों, उपाध्यक्षों और विभिन्न बोर्ड-निगमों में नियुक्तियां कर रही है वहीं नए भवनों, दफ्तरों और बड़ी गाड़ियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। चेतावनी दी कि यदि लंबित मेडिकल बिलों, डीए और एरियर का शीघ्र भुगतान नहीं किया गया तो इसका असर चुनावों में देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि पेंशनर किसी भी राजनीतिक दल के विरोधी नहीं हैं, बल्कि केवल अपने वैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।