सोमवार को उपायुक्त सोलन से मिलेगी संघर्ष समिति
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। पंजाब-हिमाचल सीमा पर स्थित माजरा कूड़ा प्लांट को लेकर संघर्ष तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मैसर्स शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड पर 6.10 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है। हालांकि, माजरा संघर्ष कमेटी और पंजाब मोर्चा के कन्वीनर गौरव राणा ने इस मुआवजे को अपर्याप्त बताया है, उनकी मुख्य मांग प्लांट को बंद करवाना है।
गौरव राणा ने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केवल मुआवजा लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी आर्थिक मुआवजे के लिए नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। संघर्ष कमेटी ने जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 की धारा 33-ए के तहत प्लांट को बंद करने की कार्रवाई करने की मांग की है।
कमेटी ने सवाल उठाया कि जब बोर्ड ने प्रदूषण संबंधी उल्लंघन स्वीकार किया है, तो प्लांट बंद क्यों नहीं किया जा रहा। संघर्ष समिति ने सोमवार को डीसी सोलन के समक्ष प्लांट तत्काल बंद करने की मांग रखने की बात कही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो पंजाब-हिमाचल सीमा पर आंदोलन तेज किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 29 सितंबर को आदेश जारी किया था। इसमें कंपनी को सात दिन के भीतर मुआवजा राशि जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड की जांच में प्लांट के विभिन्न स्थानों से लिए गए पानी के नमूनों में कई प्रदूषक पाए गए। टीएसएस, सीओडी, बीओडी, अमोनियाकल नाइट्रोजन, सल्फेट और लेड जैसे तत्व निर्धारित मानकों से अधिक थे।
कंपनी का जवाब अस्वीकृत
कंपनी ने अपने जवाब में नालों में मौजूद पानी को वर्षा जल से जोड़ा था। उन्होंने इसे उपचारित करने की योजना का हवाला दिया। लेकिन बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि 19 मई को बारिश से पहले सूखे मौसम में भी नालों में तरल पदार्थ मौजूद पाया गया था।