विश्व धरोहर कालका-शिमला ट्रैक पर सैलानियों की मस्ती दुर्घटनाओं को न्योता दे रही है। सैलानी अपनी जान जोखिम में डालकर यहां सैर सपाटा कर रहे हैं। 96 किलोमीटर के इस सफर में कई जगह बेहद सुंदर और दिल को मोहित करने वाले स्थल हैं।
इनका आकर्षण सैलानियों को बरबस ही अपनी ओर खींच ले आता है। कालका-शिमला सड़क मार्ग पर रेलवे लाइन भी कई जगह साथ मिलती है। लेकिन आकर्षण से भरे इन स्थलों में सैलानी और कुछ स्थानीय लोग कुछ इस कदर मस्ती में खो जाते हैं जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
रेलवे और सड़क के साथ मिलने वाले इन स्थलों पर पर्यटक अपनी जान की परवाह किए बगैर कई बार पटरी पर कभी फोटो खींचने बैठ जाते हैं तो कभी मस्ती करना शुरू कर देते हैं। यही नहीं कुछ लोग तो कई बार ट्रैक पर अपनी कारें तक ले जाते हैं। रेलवे मार्ग के कई प्वाइंटों को सैलानियों ने शराब का अड्डा भी बना रखा है। इससे अक्सर हादसों की आशंका बनी रहती है।
इन जगहों पर टूट रहे हैं नियम
परवाणू से सात किलोमीटर दूर कोटी रेलवे स्टेशन के पास सुरंग नंबर 10 में रेलवे लाइन और नेशनल हाइवे एकसाथ चलते हैं। इसमें मात्र 5 से 10 फुट का फासला है। पर्यटक लापरवाह होकर इस स्थान पर अपने वाहन रेलवे ट्रैक तक पहुंचा देते हैं। इससे जहां विश्व धरोहर ट्रैक को खतरा होता है वहीं सैलानियों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है।
जाबली, धर्मपुर और ध्यारी घाट में भी दिक्कत
परवाणू की तरह ही इसी तरह का नजारा जाबली-धर्मपुर के बीच रेलवे क्रासिंग के पास फाटक पर भी देखने को मिलता है। यहां फाटक बंद होने पर पर्यटक और स्थानीय लोग भी टहलते हुए दिखाई देते हैं। पर्यटक फाटक बंद होने के बाद ट्रेन के आने के समय ट्रैक पर पहुंच जाते हैं। इस दौरान कई घटनाएं भी हो चुकी हैं।
लेकिन आरपीएफ ने कोई कदम नहीं उठाए है। इसके अलावा टकसाल, चंबाघाट, कंडाघाट शिमला मार्ग पर ध्यारी घाट के पास भी लोगों के झुंड ट्रैक पर डटे रहते हैं। रेलवे अधिनियमों की अवहेलना करने पर 6 माह की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। नियमों के अनुसार ट्रक के पास किसी भी वाहन को ले जाना कानूनी अपराध है। ट्रेन के समय पर किसी भी व्यक्ति का ट्रैक पर आना जाना भी कानून का उल्लंघन है। नियमों की उल्लंघन करने पर रेलवे एक्ट 159 और 147 के तहत 1000 जुर्माना और एक साल तक की सजा हो सकती है।
पंचायतें कई बार कर चुकी हैं शिकायतें
रेलेव ट्रैक पर बढ़ते हादसों और ट्रैक पर वाहन लेने जाने की घटनाओं को लेकर जाबली, धर्मपुर, परवाणू के साथ लगी पंचायत सलोगड़ा के प्रतिनिधि कई बार रेलवे पुलिस से इन रास्तों को बंद करने या यहां गश्त बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
समय-समय पर काटे जाते हैं चालान : दिनेश
डीआरएम दिनेश कुमार ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विभाग समय-समय पर कार्रवाई करता रहता है। संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी भी की जाती है। इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और पोस्ट भी लगाए जाएंगे ताकि लोगों को कोई समस्या न हो।