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Solan News: कथा में सुनाया कण्व ऋषि और शकुंतला का प्रसंग

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कुनिहार (सोलन)। कांवड़ सेवा समिति हाटकोट कुनिहार की ओर से आयोजित शिव महापुराण कथा का विधिवत समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन सुप्रसिद्ध कथा व्यास एवं राष्ट्रीय प्रचारक गोरक्षा दल शशांक कौशल ने श्रद्धालुओं को योग साधना और सनातन संस्कृति के महत्व के बारे में जानकारी दी। शशांक कौशल ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन और वैज्ञानिक परंपरा है। योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि मन और आत्मा को संतुलित करने की साधना भी है। नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान करने से व्यक्ति तनाव और मानसिक अशांति से दूर रहकर सकारात्मक जीवन जी सकता है। उन्होंने युवाओं से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कण्व ऋषि, शकुंतला और राजा दुष्यंत से जुड़ा प्रसंग भी सुनाया। बताया कि कण्व ऋषि महान तपस्वी और विद्वान ऋषि थे। उनके आश्रम में शकुंतला का पालन-पोषण हुआ। वन में शिकार करते हुए राजा दुष्यंत कण्व ऋषि के आश्रम पहुंचे। जहां उनकी मुलाकात शकुंतला से हुई। दोनों के बीच प्रेम हुआ और गंधर्व विवाह हुआ। बाद में शकुंतला ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिसका नाम भरत रखा गया। कण्व ऋषि ने भरत का पालन-पोषण संस्कारों के साथ किया। भरत बचपन से ही साहसी और निर्भीक थे। उनके नाम से ही भारतवर्ष के नामकरण की प्रसिद्ध मान्यता जुड़ी है।
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