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Solan News: रामेश्वर व त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा का किया वर्णन

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कुनिहार (सोलन)। तुलसी कुटीर आनंद आश्रम में श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा महोत्सव का आयोजन हुआ। कथा व्यास भगत राम नड्डा ने रामेश्वर और त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की पावन कथा सुनाई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की महिमा का श्रवण किया। भगत राम नड्डा ने बताया कि भगवान शिव की आराधना केवल मोक्ष का मार्ग नहीं है, यह मानव जीवन को सत्य, सेवा, संयम और धर्म पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का संबंध भगवान श्रीराम की मर्यादा और अटूट श्रद्धा से जोड़ा। लंका विजय से पहले श्रीराम ने समुद्र तट पर शिवलिंग स्थापित कर शिव की आराधना की थी। भगवान शिव की कृपा से ही धर्म की अधर्म पर विजय हुई। कथा व्यास ने कहा कि यह प्रसंग सिखाता है कि ईश्वर में विश्वास और विनम्रता से व्यक्ति अंततः सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा भी सुनाई। यह महाराष्ट्र के नासिक में ब्रह्मगिरि पर्वत पर स्थित है।
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यह ज्योतिर्लिंग महर्षि गौतम की कठोर तपस्या और माता गंगा के अवतरण से जुड़ा है। गौतम ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसी स्थान से पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम माना जाता है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की उपासना से मनुष्य के पापों का क्षय होता है। इससे पितृ दोष और अन्य कष्टों से मुक्ति मिलती है, जिससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का संचार होता है। कथा के दौरान पूरा पंडाल भजन-कीर्तन और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। महाआरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
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