सुबह दस बजे तक लग गई थी लंबी-लंबी लाईनें
मंगला मेले का चौथा मंगलवार, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने टेका मथा
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ के ऐतिहासिक मंगला दे चौथे मेले के अवसर पर फी भीड़ उमड़ी। ज्येष्ठ माह के चौथे मंगलवार को श्रद्धालु सुबह से ही आना शुरू हो गए और 10 बजे तक माथा टेकने के लिए लंबी लाइनें लग चुकी थीं। शीतला माता मंदिर को लेकर मान्यता है कि बच्चों व बड़ों को होने वाले चिकन पॉक्स समेत अन्य चर्म रोग ठीक होते हैं। जिसके चलते लोग यहां भारी संख्या में अपने परिवार सहित आते हैं और नई फसल का चढ़ावा चढ़ाने के अलावा मीठे गुलगुले का प्रसाद भी चढ़ाते हैं।
यह मेला हंडूर रियासत के शासनकाल से मनाया जाता आ रहा है। इस मंदिर में पुश्त दर पुश्त महंत गंगादास का परिवार इसकी सेवा करता आ रहा है। मेले में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस की ओर से शरारती तत्वों की हर गतिविधि पर पुलिस की पैनी नजर रखी जाती है और ट्रैफिक व्यवस्था से भी निपटने के लिए भी पुलिस की ओर से विशेष इंतजाम किए जाते हैं। मितियां निवासी बुध राम ने बताया कि वे बचपन से इस मेले में माथा टेकने आते हैं। पहले 10 किमी पैदल चल कर आते थे परंतु अब बस सुविधा उपलब्ध है और आना-जाना आसान हो गया है। इसलिए ज्यादा लोग मेले में आते हैं। अधिक लोग आने से अंदर जाने के लिए जो रास्ता है। श्रद्धालु उसी रास्ते ही वापस आते हैं। जिससे बिना वजह से भीड़ होती है बाहर आने के लिए मेलार्थियों को दूसरे रास्ते से आने के लिए यहां पर दिशा सूचक लगाने और मेले के दौरान किसी व्यक्ति को खड़ा करने की जरूरत है।
इनसेट
तलाब के स्थान पर अब बना दिया स्कूल
रेड़ू से आई कौशल्या देवी ने बताया कि वे भी बचपन से यहां मेले में आ रही हैं और माता शीतला का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पहले माता पिता के साथ आती थी अपने अपने बच्चों के साथ आती हैं। यहां पर पहले मंदिर के साथ तालाब था लेकिन अब यहां पर स्कूल बना दिया गया है। जिससे यहां पर जगह कम हो गई है।
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प्रसाद चढ़ाने के नहीं पर्याप्त इंतजाम
कालू झिंडा निवासी सदा राम का कहना है कि शुरू से ही उनका परिवार यहां पर अपने बच्चों और परिवार की सुख शांति के लिए माता शीतला का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। मेले के दौरान यहां पर इतनी भीड़ होती है कि लोग प्रसाद रास्ते में ही फेंक देते हैं। जो मत्था टेकने आने वाले लोगों के पैरों में लगता है। इसे सुव्यवस्थित करने की जरूरत है।
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मंदिर परिसर में वाहन पार्किंग की नहीं कोई व्यवस्था
सरौर निवासी रोशनी देवी ने बताया कि पहले गांव से सुबह जल्दी चल कर पैदल आते थे और माथा टेक कर शाम को वापस जाते थे। अब तो सुबह ही बस से आते हैं और माथा टेक कर दोपहर को वापस घर पहुंच जाते हैं। कुछ लोग अपने निजी वाहनों से आते हैं लेकिन मंदिर परिसर में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे यहां पर जाम लगा रहता है।
नालागढ़ में मंगला दे मेले के चौथे मंगलवार को उमड़ा जन सैलाब। संवाद
नालागढ़ में मंगला दे मेले के चौथे मंगलवार को उमड़ा जन सैलाब। संवाद
नालागढ़ में मंगला दे मेले के चौथे मंगलवार को उमड़ा जन सैलाब। संवाद
नालागढ़ में मंगला दे मेले के चौथे मंगलवार को उमड़ा जन सैलाब। संवाद