क्षेत्र के करीब 50 फीसदी हिस्साें में किसान झेल रहे भारी नुकसान
दवाओं के छिड़काव के बाद भी नहीं मिल रही कोई भी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला में हुई भारी बारिश के बाद टमाटर की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। क्षेत्र के लगभग 50 फीसदी हिस्सों में टमाटर की फसल में काला धब्बा यानी सड़न रोग लग गया है। टमाटर का दाना काला होने के बाद पौधे में ही खराब हो रहा है, जिसके कारण किसानों के खेतों में सड़ रहे टमाटरों के ढेर लग गए हैं। इस बीमारी से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
स्थानीय किसान हरीदत्त, मनीष, राजकुमार, गिरीश, देवदत्त, सन्नी, प्रेम चंद ने बताया कि बताया कि यह बीमारी रातों-रात पूरे खेतों में फैल रही है। हालात यह हैं कि किसानों को रोजाना अपने खेतों से दो से तीन क्रेट काले दाग वाले टमाटर निकालकर फेंकने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि एक सड़ा हुआ टमाटर बाकी बचे टमाटर को भी खराब कर रहा है। इस बार टमाटर के दाम पहले ही बहुत कम है और अब इस रोग ने बची-खुची फसल को भी तबाह कर दिया है। किसान लगातार कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही है।
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बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
टमाटर की फसल को इस बर्बादी से बचाने के लिए कृषि विभाग के उपनिदेशक देवराज कश्यप ने किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बीमारी को आगे फैलने से रोकने के लिए किसान पौधों से करीब 20 सेंटीमीटर की ऊंचाई तक के पत्तों को काट दें। यह रोग अधिक बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने से लगता है। इसलिए खेतों से पानी निकालने की उचित व्यवस्था तुरंत करें। साफ मौसम होने पर फफूंदनाशक का छिड़काव समय-समय पर 7 से 10 दिनों के अंतराल पर करें।
सोलन क्षेत्र में टमाटर की फसल में लगा काला धब्बा रोग। संवाद