स्कूलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करके शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की कवायद पर खुद स्कूल मुखिया ही पानी फेर रहे हैं। छात्रों से मासिक/ सालाना बिल्डिंग फंड वसूल कर 42 स्कूल प्रबंधनों ने कामन पूल की राशि का हिस्सा दबा लिया है। 2 से 5 सालों तक कामन पूल की राशि का कोई लेखा जोखा नहीं रखा है। मामला निदेशालय की पकड़ में आने के बाद उच्च शिक्षा उपनिदेशक को कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
42 डिफाल्टर स्कूलों की सूची जारी करते हुए उच्च शिक्षा उपनिदेशक ने दो दिन के भीतर यह राशि जमा करवाने की हिदायत दी है अन्यथा कारण बताओ नोटिस जारी करने की कवायद शुरू होगी।
जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर स्कूल मुख्यिाओं का इंक्रीमेंट तक रोका जा सकता है।
डिफाल्टर स्कूलों की सूची
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बरूणा, भोजनगर, बिसा, भाटिया, जोंघों, चमघार, चंडी (ए), चंडी (एस), डगशाई, धर्मपुर, धुंधन, दिग्गल, डुमेहर (ए) अर्की, देओनघाट, देयोठी, घरेड़, गुलरवाला (बी), जौनाजी, कुनिहार(जी), कंडाघाट, कोटी कुंडलु, कल्होग, मांगल, ममलीग, मितियां, पटटा मसूलखाना, सुबाथू, सुबाथू (जी) सरकारी हाई स्कूल बैरल, भोजनजी, चेवा, दरवा, डकरियाना, दुर्गापुर दरदी, घरीच, लगड़ाघाट, नवाग्राम, पांजल, रौडी(ए), सनावर और बारियां स्कूल शामिल हैं।
बैंक ड्राफ्ट से जमा करवाएं रकम
जिला के 29 स्कूलों के प्रधानाचार्यों को दो दिन के भीतर स्कूल बिल्डिंग फंड का 50 प्रतिशत शेयर कामन पूल मनी में बैंक ड्राफ्ट द्वारा जमा करने के निर्देश जारी किए हैं। उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय के अनुसार स्कूलों द्वारा 2 से 5 सालों से वसूली जा रही भवन निधि का 50 प्रतिशत हिस्सा विभाग के पास जमा नहीं करवाया है। इस पर उपनिदेशक कार्यालय कड़ा रुख अपनाने जा रहा है।
यह है बिल्डिंग फंड
स्कूल द्वारा जमा एक और जमा दो कक्षा से साल में एक बार तथा कक्षा नौंवीं और दसवीं के विद्यार्थियों से हर माह स्कूल फीस के साथ एक निश्चित राशि बिल्डिंग फंड के रूप में ली जाती है। इसे स्कूल के रखरखाव पर खर्च किया जाता है। स्कूलों द्वारा सालभर जमा की गई इस राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा उच्च शिक्षा विभाग को कामन पूल के तहत जाता है।
यह है कामन पूल मनी
कामन पूल वह राशि है जो स्कूलों द्वारा उच्च निदेशालय में जमा करवाई जाती है। यह राशि जिलाभर में स्थित वरिष्ठ माध्यमिक और हाई स्कूलों के भवनों तथा अन्य बुनियादी ढांचे की आवश्यकता को पूरा करने के लिए उपयोग में लाई जाती है।
डिफाल्टरों पर होगी कार्रवाई : जीवन शर्मा
उच्च शिक्षा उपनिदेशक जीवन शर्मा ने कहा कि जिला में कई स्कूल ऐसे हैं जो पांच सालों से कामन पूल मनी में यह राशि जमा नहीं करवा रहे। इससे विभाग को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस कारण जिन स्कूलों में इस राशि की सख्त जरूरत होती है उन्हें यह नहीं मिल पाती। इसके अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। 42 स्कूल डिफाल्टर की श्रेणी में हैं। इन पर कार्रवाई की जा रही है।