अर्की (सोलन)। बिजली की हाईटेंशन तार की चपेट में आकर अपना हाथ गंवा बैठी निरूका को अभी तक सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल पाई है। एक गरीब परिवार की बेटी निरूका के इलाज में भी आम लोगों ने ही मदद की। विद्युत बोर्ड ने निरूका के परिवार को एक पैसा नहीं दिया है। प्रशासन ने पंद्रह हजार रुपये की फौरी राहत प्रदान की थी। इलाज पर एक लाख से अधिक का खर्चा हो चुका है। अब बच्ची का इलाज आम लोगों की मदद से चल रहा है। इस मामले को लेकर गठित जांच कमेटी भी किसी फैसले पर नहीं पहुंच पाई है। इस जांच को लेकर बोर्ड के सब डिविजन कार्यालय में जांच कमेटी की बैठक हुई। बैठक में सदस्यों सहित पंचायत दाड़ला के प्रधान और मकान मालिक ओम प्रकाश को भी बुलाया था।
विद्युत बोर्ड के एसडीओ देवेंद्र कौंडल ने बताया कि इस मामले को लेकर सभी से गहनता से पूछताछ की जा रही है। इसमें रिटायर्ड कर्मचारियों को भी जांच के घेरे में लाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ निरूका के पिता राजेश और नाना छोटूराम ने बताया कि उन पर कमेटी द्वारा केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। बताया कि कमेटी के सदस्य उनसे उल्टे सीधे सवाल पूछ रहे हैं। दाड़लाघाट में 12 फरवरी को निरूका ओमप्रकाश के मकान की छत के ऊपर खेल रही थी। खेलते समय वह हाईटेंशन लाईन की चपेट में आ गई थी। बाद में उसका एक हाथ काटना पड़ा था। उधर, हिमाचल बचाओ मंच के संस्थापक एसएस गुलेरिया ने बताया कि विद्युत बोर्ड जल्द ही कोई निर्णय लें अन्यथा उनके पास और भी विकल्प खुले हैं। उन्होंने बताया कि निरूका के नेपाली मूल के होने की वजह से बोर्ड यह रवैया अपना रहा है।