फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परवाणू में चार माह से धधक रहा लावा फूटा, यूनियन पर कब्जे का संघर्ष जारी

विज्ञापन
विज्ञापन
चार माह से धधक रहा लावा फूटा, यूनियन पर कब्जे को संघर्ष जारी
विज्ञापन

परवाणू में जून माह में हुई थी पहली बार झड़प, प्रशासन को लागू करनी पड़ी थी धारा 144
यूनियन देती है चालकों को सुरक्षा और काम की गारंटी, बदले में कटती है पर्ची
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। परवाणू में करीब चार माह से उबल रहा लावा धधक कर बाहर आ गया। जून माह में कैंटर यूनियन पर कब्जे को लेकर संघर्ष शुरू हुआ था। करोड़ों की कमाई वाली इस यूनियन में सिक्का चलाने की होड़ में बावा और परवाणू ट्रांसपोर्ट कोऑपरेटिव सोसायटी के प्रधान अमरनाथ शर्मा आमने-सामने आ गए थे। हालांकि, बावा ने अपना वर्चस्व जमाते हुए अमरनाथ शर्मा पर भारी साबित हुए और उन्होंने कैंटर यूनियन पर अपना कब्जा जमा लिया। प्रशासन को पिछली बार हालात सामान्य करने में एक सप्ताह से ज्यादा का समय लग गया था और धारा 144 लागू करनी पड़ी थी। दोनों गुटों के समर्थकों को अलग-अलग रखने में पुलिस को भी काफी पसीना बहाना पड़ा। अब वैसे ही हालात एक बार फिर से परवाणू में बन गए हैं। वीरवार सुबह की घटना ने कुछ देर के लिए परवाणू को पूरी तरह से संघर्ष में झोंक दिया। इस घटना में कई गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई है। गौरतलब है कि परवाणू ट्रक यूनियन में करोड़ों की कमाई का जरिया है। उद्योग से सारा तैयार और कच्चा माल ट्रकों से प्रदेश से बाहर आता-जाता है। यूनियन से ट्रक व्यवस्थित रूप से माल उठाते हैं। यूनियन चालकों की सुरक्षा की गारंटी भी देती है। इसके एवज में यूनियन की पर्ची काटी जाती है जो आय का मुख्य जरिया भी है। साल भर में यह आय करोड़ों तक पहुंच जाती है। यही वजह है जो परवाणू में ट्रक यूनियन अध्यक्ष का पद दो गुटों के बीच अहम का केंद्र बन गया है। ये है विवाद की जड़
कैंटर यूनियन और परवाणू ट्रांसपोर्ट कोऑपरेटिव सोसायटी दोनों ट्रक यूनियन पर अधिकार जताते रहे हैं। परवाणू ट्रांसपोर्ट कोऑपरेटिव सोसायटी उन लोगों को साथ लेकर बनाई गई थी जिनकी जमीनें उद्योग लगने के बाद चली गई। इन लोगों ने अपने ट्रक डाले और सोसायटी शुरू की। लेकिन सोसायटी के तौर-तरीके से कुछ ट्रांसपोर्टर नाराज हो गए और उन्होंने बावा हरदीप सिंह की अगुवाई में नई यूनियन खड़ी कर दी। जून माह में दोनों यूनियनों के बीच कुर्सी को लेकर संघर्ष हुआ। इसमें बावा गुट ने यूनियन के कार्यालय के चाबी हासिल कर ली। उस समय प्रशासन ने दोनों गुटों से अपने-अपने ट्रांसपोर्टर की सूची मांगी थी। इस सूची में बावा गुट के समर्थक ज्यादा थे। इसकी वजह से अमरनाथ शर्मा को कब्जा छोड़ना पड़ा।
विज्ञापन

परवाणू में अभी नहीं लगी धारा 144 : उपायुक्त
उपायुक्त विनोद कुमार का कहना है कि प्रशासन ने अभी तक परवाणू में धारा 144 लागू नहीं की है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। पुलिस अधिकारियों को मामला संभालने के कड़े निर्देश हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ही देर में माहौल को काबू कर लिया गया था। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।
विज्ञापन

22 सितंबर को गई थी बावा हरदीप सिंह की पदवी
बावा हरदीप सिंह इंटक यूनियन के लोकतांत्रिक अध्यक्ष चुने गए। उन्हें वर्ष 2017 में 148 यूनियनों की रजामंदी से तीन साल के लिए प्रदेशाध्यक्ष चुना था। इस बार उन्होंने नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस वजह से कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। बावा हरदीप सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता रहा है। इस वजह से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू से उनकी दूरियां काफी बढ़ चुकी हैं। हाल ही में 22 सितंबर को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की शह पर नालागढ़ से बबलू पंडित को इंटक की कमान देने का फैसला किया गया। इसका बावा समर्थक और इंटक से जुड़े पदाधिकारी लगातार विरोध कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें