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तीन महीने में 38 दवाओं के सैंपल हो चुके फेल

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Medicine
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अमर उजाला ब्यूरो

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बद्दी (सोलन)।
एशिया की 35 फीसदी दवाएं निर्माण करने का रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले हिमाचल के दवा उद्योगों के सैंपल फेल होने पर कई सवाल उठ खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के कड़े निर्देशों के बावजूद दवा के सैंपलों के फेल होने का क्रम थम नहीं रहा है।

इस साल तीन माह के भीतर 112 सैंपलों में से 38 फेल हो चुके हैं। बीते वर्ष के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो 373 लिए गए सैंपलों में से हिमाचल प्रदेश के उद्योगों की बनी 110 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जनवरी में फेल हुए सैंपल के मामले में प्राधिकरण को कड़ी लताड़ लगाई थी। हिमाचल दवा नियंत्रक प्राधिकरण के उद्योगों पर सख्ती होने की बात कहने के बावजूद दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। इससे विश्व के मानचित्र के पटल पर उभरे प्रदेश की छवि पर भी इसका विपरीत असर पड़ रहा है।
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हर माह जारी होने वाले सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) के ड्रग अलर्ट में प्रदेश की दवाओं के सैंपल फेल ही पाए जाते हैं। प्रदेशभर में करीब 750 फार्मा उद्योग हैं। इनमें से कई उद्योगों में निर्मित दवाओं पर सवाल उठते ही रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार के निर्देशों के बाद दवा नियंत्रण प्राधिकरण ने जनवरी में प्रदेश के उद्योगों के आठ सैंपल फेल होने पर कड़ा संज्ञान लिया और सैंपल फेल होने वाले दवा निर्माता उद्योगों को नोटिस जारी कर दवा निरीक्षकों को निरीक्षण के आदेश जारी किए।

इस दौरान कहा गया कि यदि रिपोर्ट में खामी या फिर जीएमपी और जीएलपी की अवहेलना होती है दवा उत्पादन रोकने के अलावा उद्योगों के प्रोडक्ट लाइसेंस सस्पेंड असैा कैंसिल जैसी कार्रवाई की जाने की बात कही गई थी। ताजातरीन ड्रग अलर्ट में एक बार फिर हिमाचल के दवा उद्योगों की 16 दवाएं फेल हो गई हैं। हालांकि सीडीएससीओ द्वारा हर माह दिए जाने वाले ड्रग अलर्ट के बाद विभाग हरकत में आता है और सैंपल फेल होने वाली दवाओं का बैच मार्किट से उठा लिया जाता है।
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अॅथोरिटी सजगता से कर रही काम : मरवाह
राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाहा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों के बाद अॅथोरिटी ने कड़ा संज्ञान लिया है। उद्योगों में बन रही अलग-अलग दवाओं के 56 सैंपल भी भरे हैं। इन्हें जांच के लिए भेजा गया है। इनमें से सोलन जिला से 6, सिरमौर जिला से 5 और कांगड़ा जिला से 4 सैंपल एकत्रित किए गए है। उन्होंने कहा कि कई दवाओं में वातावरण का भी असर पड़ता है। फिलवक्त आथोरिटी की बद्दी में ही अपनी ड्रग लैब बन रही है।

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