नालागढ़ अस्पताल से मरने के बाद रेफर किया था घायल : जीवीके प्रबंधन
नालागढ़ हत्या मामले में जीवीके कंपनी ने डॉक्टर पर उठाए सवाल
एंबुलेंस के देरी से पहुंचने और ऑक्सीजन सिलेंडर न होने पर सफाई में बोले प्रभारी
अमर उजाला ब्यूरो
नालागढ़ (सोलन)। राष्ट्रीय एंबुलेंस चला रही संस्था जीवीके ने नालागढ़ अस्पताल प्रबंधन पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। एंबुलेंस के पहुंचने में देरी और बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के उसे पीजीआई भेजने के मामले में सफाई देते हुए कंपनी प्रबंधन ने डॉक्टर को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। एंबुलेंस प्रबंधन ने नालागढ़ अस्पताल के आपातकाल कक्ष में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर पर मृत शरीर को पीजीआई रेफर करने की बात कही है। जीवीके ईएमआरआई के जोनल प्रभारी आकाशदीप ने कहा कि चाकू लगने के बाद अस्पताल लाए गए घायल की मौत हो चुकी थी। उसे पीजीआई रेफर करने की आवश्यकता नहीं थी लेकिन डॉक्टर ने रेफर कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी एंबुलेंस में हमेशा ऑक्सीजन उपलब्ध रहती है। उन्होंने कहा कि घटना नालागढ़ अस्पताल से दो किलोमीटर दूरी पर हुई है। उन्होंने कहा कि पवन कुमार का फोन 1:39 बजे 108 एंबुलेंस के लिए आया था। इस पर नालागढ़ में एबुलेंस को संपर्क किया गया लेकिन उनका नंबर आउट ऑफ कवरेज आ रहा था। दूसरी जगह से एंबुलेंस को फोन पर संपर्क किया और 17 मिनट बाद 1 बजकर 56 मिनट पर वहां एंबुलेंस को भेज दिया गया। जब एंबुलेंस मौके पर पहुंची, मरीज को अस्पताल पहुंचा दिया गया था।
न्यू नालागढ़ में पवन उर्फ पंकी पुत्र वीर सिंह निवासी गांव नरनू डाकघर रैहन तहसील नुरपुर जिला कांगड़ा व अमित कुमार ट्रक ड्राईवर निवासी कांगड़ा व पवन पुत्र ठाकरू निवासी चंबा कमरे में शराब पी रहे थे। अमित व पवन उर्फ पंकी आपस में बहसबाजी कर रहे थे। कुछ समय बाद पवन पुत्र ठाकरू ने इसी भवन में रहने वाले अन्य पड़ोसी पवन कुमार पुत्र कृष्ण लाल निवासी गांव सुनली रूग डाकघर जयनगर, तहसील नालागढ़ का दरवाजा खटखटाया और कहने लगा कि अमित ने पवन उर्फ पंकी को चाकू मार दिया है। इसके बाद पवन चंबा अपनी बाइक पर घायल अवस्था में पवन उर्फ पंकी को नालागढ़ अस्पताल पर ले गया। पवन कुमार ने आरोप लगाया था कि 108 एंबुलेंस पहले समय पर नहीं आई और जब घायल को पीजीआई रेफर किया गया तो उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था। इस वजह से घायल की मौत हो गई।
मरीज सदमे में था, इसलिए रेफर किया : डॉक्टर
नालागढ़ अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में तैनाज डॉ. चंद्र मल्होत्रा का कहना है कि मरीज सदमे में था। उन्होंने उसकी पूरी जांच करने के बाद उसे रेफर किया है। उन्होंने कहा डॉक्टर का पेशा मरीज की जान बचाना है, इसके लिए उन्होंने अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किया।
बीएमओ डॉ. कुलदीप जसवाल का कहना है कि मौके पर मौजूद डॉक्टर की राय सर्वमान्य होती है। डॉक्टर ने मरीज को रेफर किया था तो किसी अन्य की राय लेने की जरूरत नहीं है।