जुन्गा से आई फोरेंसिक टीम ने चॉकलेट उद्योग से भरे सैंपल
घटनाक्रम को कई बार दोहराया, मृतक कामगार की बलि लेने वाली मशीन खंगाली
मुआवजे पर नहीं हो पाया फैसला, उत्पादन पांचवें दिन भी ठप
अमर उजाला ब्यूरो
बद्दी (सोलन)। चॉकलेट उद्योग में मशीन में आकर जान गंवाने वाले कामगार की मौत की जांच करने के लिए शिमला के जुन्गा से आकर फोरेंसिक टीम ने औैद्योगिक क्षेत्र बद्दी के निकट हरिपुर संडोली में स्थापित कारखाने मांडलिस इंटरनेशनल सैंपल लिए। सुबह से फोरेंसिक अधिकारी नसीब पटियाल विशेषज्ञ ने कंपनी का दौरा किया और बारीकी से हर पहलू खंगाला। उन्होंने उत्पादन कक्ष का वह सेक्शन भी जांचा जहां मिल्खी राम की मशीन में गिरकर मौत हो गई थी। उन्होंने रक्त से सनी पूरी मशीन से खून के सैंपल एकत्रित किए और यह देखा कि एक चलती हुई मशीन में मंडी के सरकाघाट का रहने वाला कामगार मिल्खी राम अपने आप कैसे पहुंच गया। मशीन को कई बार चलाकर और बंद करके देखा गया। इस दौरान इस बात की जांच की गई कि मजदूर इसकी चपेट में कैसे आया। इस मशीन में सेंसर लगा होता है और एक विशेष इशारे और संकेत से ही चलता है। उन्होंने रुईं लेकर मशीन में फंसे मांस व बाल के टुकड़ों को भी बारीकी से जुटाया और उसको सीलबंद कर दिया। दूसरी ओर डीएसपी खजाना राम ने बताया कि फोरेंसिक टीम ने शिमला से आकर पुलिस की मौजूदगी में खून से सनी मशीन और उसके पाटर्स के सैंपल जुटाए जिसकी रिपोर्ट संबधित एक्सपर्ट बाद में देंगे। वहीं पांच दिन से प्रबंधकों व श्रमिकों के बीच में चल रहा गतिरोध बुधवार को भी जारी रहा। उत्पादन पांचवें दिन भी ठप रहा। मृतक के परिजनों ने कंपनी के समक्ष जो मांगे रखीं उस पर आज भी कोई फैसला नहीं हो सका। मृतक के परिजन इस बात पर अड़े हैं कि उनको एक करोड़ मुआवजा और एक परिजन को नौकरी दी जाए। इस बात को स्थानीय अधिकारियों ने अपने मुंबई कार्यालय भेज दिया और वहां से एक-दो दिन में फैसला आ सकता है।
श्रम आयुक्त को सौंपी रिपोर्ट : करोल
श्रम अधिकारी बद्दी मुनीष करोल ने बताया कि इस पूरे केस की रिपोर्ट बनाकर श्रम आयुक्त को शिमला भेज दी है। इसमें पूरा विवरण दिया गया है कि मजदूर कब से उद्योग में कार्यरत था और उसका ईएसआई पीएफ नंबर क्या था। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार को कितना मुआवजा देना है, यह कंपनी ने प्रभावित परिवार के साथ मिल बैठ तय करना है। यह दोनो पक्षों के बीच की बात है।