संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। पारिवारिक न्यायालय सोलन की अदालत ने शादीशुदा होने की बात छिपाकर विवाह करने, मारपीट, मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण के एक मामले में पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा के तहत क्रूरता को आधार मानते हुए शादी को समाप्त करने का आदेश दिया है। यह फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश-1 अभय मंडियाल की अदालत ने सुनाया।
मामले के अनुसार, सोलन निवासी महिला का विवाह 20 नवंबर 2020 को बजरोल जौणाजी रोड सोलन क्षेत्र के निवासी के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था। विवाह के बाद पीड़िता को पता चला कि उसका पति पहले से शादीशुदा है और उसने यह बात छिपाकर धोखाधड़ी की है। पीड़िता ने अदालत को बताया कि शादी के बाद पति उसके साथ मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न करता था। पीड़िता एक स्कूल में मिड-डे मील वर्कर के रूप में कार्यरत थी और उसे बहुत कम मानदेय मिलता था। इसके बावजूद पति उसे भोजन व दैनिक जरूरतों से वंचित रखता था, जिसके चलते उसके माता-पिता को राशन की व्यवस्था करनी पड़ती थी। पति के लगातार उत्पीड़न और आर्थिक शोषण से तंग आकर अगस्त 2022 में महिला अपना ससुराल छोड़कर मायके चली गई और तब से दोनों अलग रह रहे थे। अदालत में सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पति और उसके वकील के उपस्थित न होने के कारण 24 दिसंबर 2025 को मामले को एकतरफा घोषित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता के बयानों और साक्ष्यों का प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोई खंडन प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने अपने फैसले में माना कि पति ने पत्नी के साथ शारीरिक व मानसिक क्रूरता, आर्थिक शोषण और धोखाधड़ी की है। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए दोनों के विवाह को समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए।