उपायुक्त व पंचायत प्रतिनिधियों की अध्यक्षता में भरे जाएंगे सैंपल
एफसीआई ने सभी राज्य के लिए नोडल अधिकारी भी किया है नियुक्त
शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश और जिला स्तर पर भी गठित की कमेटी
ललित कश्यप
सोलन। सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील के तहत बनने वाले अब कच्चे राशन और पके भोजन की भी जांच होगी। उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी सैंपल लेगी, जिसमें पंचायत प्रतिनिधि समेत नोडल अधिकारी भी शामिल होंगे। पके हुए भोजन के सैंपल को मोहाली और राशन को सीटीएल लैब कंडाघाट भेजा जाएगा। इसके लिए एफसीआई ने हिमाचल समेत अन्य सभी राज्यों के लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया है। जबकि जिलास्तर पर भी जांच के लिए शिक्षा निदेशालय की ओर से एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। शिक्षा निदेशालय ने भी सभी स्कूलों को खाना बनाने के लिए स्वच्छता बरतने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार प्रदेश भर में प्री नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के 5.34 लाख बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जा रहा है। पहले जैसा भी खाना बनाया जाता था, उसे सीधे बच्चों को बांट दिया जाता था। इसकी वजह से बच्चों को कई बार खराब खाना मिलता था। लेकिन अब अभिभावक या फिर एमडीएम प्रभारी पहले खाने की टेस्टिंग करेंगे। इसमें खाने की गुणवत्ता को लेकर इसके सैंपल भी लिए जाएगें।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के प्रदेश एमडीएम नोडल अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि सभी स्कूलों को खाना बनाने और परोसने में स्वच्छता बरतने के निर्देश दिए हैं। बच्चों को बेहतरीन खाना मिले इसके लिए अभिभावकों को भी खाने का स्वाद चखाया जा रहा है, जिसका रिकॉर्ड भी स्कूल को रखना होगा। कच्चे और पके भोजन की भी जांच की होगी। उधर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि स्कूल में मिलने वाले कच्चे और पके भोजन की जांच के लिए प्रदेश और जिलास्तर पर टीमें गठित की गई हैं। उन्होंने सभी एमडीएम जिला नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन की समय-समय पर जांच करते रहें। जिसमें स्वच्छता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।