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पता बदलने पर शहरवासी नाराज, ग्रामीणों का निगम में शामिल होने से इंकार

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सोलन। नगर निगम सोलन के गठन को लेकर जिला प्रशासन की ओर से मांगी सुझाव और आपत्तियों की मोहलत समाप्त हो गई है। प्रशासन को अब तक 20 आपत्तियां नगर निगम के संबंध में मिली हैं जिन पर नौ नवंबर को उपायुक्त सोलन फैसला सुनाएंगे। इन पर जिला प्रशासन ने मंथन शुरू कर दिया है। निगम बनने से शहर के लोगों का पता बदलने पर शहरवासी नाराज हैं। वहीं ग्रामीण अभी भी निगम में शामिल होने से इंकार कर रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र के लोग अभी इन क्षेत्रों को निगम में मर्ज करने के विरोध में अड़े हैं। वहीं, शहरवासियों को पुनर्सीमांकन के चलते उनका स्थायी पता बदल जाने की आशंका है। इसे लेकर लोगों ने जिला प्रशासन के समक्ष आपत्तियां दर्ज की हैं। एसडीएम सोलन अजय कुमार यादव ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रशासन से जारी मोहलत समाप्त हो गई है। अभी तक कुल 20 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। कुछ सुझाव और आपत्तियां डाक से भी आई हैं। लिहाजा इनकी संख्या बढ़ सकती है।
सोलन नगर निगम बनने के बाद कुछ संस्थाओं और प्रतिनिधियों ने अपनी आपत्तियां जिला प्रशासन के पास दर्ज करवाई हैं। जिला प्रशासन इन सभी आपत्तियों को गहनता से जांच रहा है। जल्द ही इन आपत्तियों पर कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम सोलन अजय यादव ने बताया कि जब भी कोई नगर परिषद से नगर निगम बनता है तो उसमें शामिल नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाते हैं। इन्हें एक निश्चित समय के भीतर नागरिकों को दर्ज करना होता है। सोलन में भी ये आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
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उन्होंने बताया कि इन आपत्तियों पर नौ नवंबर तक मंथन किया जाएगा। उसके बाद उपायुक्त सोलन अपना निर्णय सुनाएंगे। उन्होंने बताया कि कुछ नागरिक मांग कर रहे थे कि वार्डों के परिसीमन करने से करीबन 40 हजार लोगों के स्थायी पते बदल जाएंगे। इसके चलते उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इस मुद्दे पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। कुछ गांववासियों की आपत्ति है कि उनका क्षेत्र नगर निगम में लिया गया है और उसे निगम से बाहर किया जाना चाहिए। जिला प्रशासन इन सभी सुझावों और आपत्तियों पर जल्द अपना फैसला सुनाएगा।
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