कुनिहार के समीप देलगी गांव में आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान मौजूद महिलाएं। संवाद
कुनिहार (सोलन)। कुनिहार के समीप देलगी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का वीरवार को विशाल भंडारे के साथ समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथावाचक नागेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के गोलोक गमन और सुदामा चरित्र के प्रसंगों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अहंकार से बचने का दिया संदेश शास्त्री ने कहा कि द्वापर युग के अंत में यादव वंश का आपसी संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि अहंकार और वैमनस्य हमेशा विनाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण की पृथ्वी लीला के समापन की चर्चा करते हुए कहा कि प्रभु का गोलोक गमन यह दर्शाता है कि ईश्वर जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हैं और केवल संसार के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं। भक्ति ही मोक्ष का एकमात्र मार्ग कथावाचक ने सुदामा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सच्ची मित्रता और निष्काम भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। महिला मंडल देलगी की प्रधान रीता वर्मा व अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि कथा के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया