बड़े शहरों की तर्ज पर जिला सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी और परवाणू में 24 घंटे पानी देने की मुहिम को तगड़ा झटका लगा है
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बड़े शहरों की तर्ज पर जिला सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी और परवाणू में 24 घंटे पानी देने की मुहिम को तगड़ा झटका लगा है। पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड के तहत दोनों प्रोजैक्ट तैयार होने हैं लेकिन कोई भी बड़ी कंपनी इस प्रोजेक्ट को लेने को तैयार नहीं। लिहाजा आईपीएच की इस बड़ी योजना पर हकीकत का रंग चढ़ता नहीं दिख रहा।
एचपीआईडीबी (हिमाचल प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर डवेल्पमेंट बोर्ड) इस पर काम कर रही है। शहरी क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत के चलते लोग परेशान हैं। ऐसे में 24 घंटे पानी मुहैया करवाने के प्रोजेक्ट की जब कवायद शुरू हुई थी तो लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बंधी थी लेकिन प्रोजेक्ट को हाथ में लेने के लिए किसी कंपनी के तैयार नहीं होने से लोगों को तगड़ा झटका लगा है।
सरकार ने एक विशेष योजना के तहत शहरी क्षेत्रों से 24 घंटे पानी मुहैया करवाने संबंधी प्रपोजल मांगी थीं। इस पर सभी आईपीएच सब डिविजनों ने प्रोपोजलें सरकार को भेजी थीं। डीसी सोलन डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि इन योजनाओं की उन्हें जानकारी नहीं है। इस संबंध में पता किया जाएगा। अगर प्रशासन की तरफ से इन योजनाओं को लागू करने में कोई मदद चाहिए होगी तो करेंगे।
90 हजार की आबादी होनी है लाभान्वित
बद्दी में करीब 60 हजार लोग और परवाणू के करीब 30 हजार लोग इस योजना से लाभान्वित होने हैं। यदि योजना रंग लाती है तो काम की तलाश में शहरी क्षेत्रों में बसने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। लोगों को भी पानी के संकट से नहीं गुजरना पड़ेगा। गर्मियों में पेयजल किल्लत काफी गहरा जाती है। पेयजल संकट को लेकर लोग कई बार आईपीएच कार्यालय का घेराव भी कर चुके हैं। दोनों योजनाएं करीब 18 करोड़ की हैं। परवाणू में इस योजना के तहत 8 करोड़ और बद्दी में 10 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। यह अपनी तरह ही पहली पेयजल योजनाएं हैं, जिन्हें पीपीपी मोड पर दिया जाना है।
उद्योगों को मिलना था लाभ
यह योजनाएं रंग लाती हैं तो उद्योगों को इसका काफी फायदा मिलना था। वर्तमान में पानी की भारी कमी है। उद्योगों में टैंकर के माध्यम से आपूर्ति पूरी की जाती है। महंगी कीमतों पर उद्यमी बाहरी राज्यों से पानी की टैंकरों के माध्यम से खरीद करते हैं। हालांकि समय-समय पर यह मुद्दा उद्यमियों द्वारा उठाया भी जाता रहा है। लेकिन आईपीएच की योजनाओं पर रंग चढ़ता नजर नहीं आ रहा है। वर्तमान में गर्मियों के अलावा सर्दियों में भी पेयजल किल्लत का लोगों को सामना करना पड़ रहा है।