पांच पांडव बाड़ा देव मंदिर बाड़ीधार। संवाद
जून में आने वाली संक्रांति को लगता है मेला
मान्यता, लोगों की मनोकामनाएं भी होती हैं पूरी
मेले में दूरदराज के लोग करते हैं शिरकत
योगेश शर्मा
अर्की(सोलन)। अर्की उपमंडल के प्राचीन ऐतिहासिक स्थल बाड़ीधार शक्ति पीठ के रूप में विख्यात है। बाड़ीधार का प्राचीन इतिहास पांडवों से जुड़ा हुआ है। प्रत्येक वर्ष जून में आने वाली संक्रांति को यहां पर मेला सजता है। यह मेला बाड़ी के नाम से जाना जाता है। दूरदराज क्षेत्र के लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और शीश नवाते हैं।
प्रसिद्ध बाड़ीधार महाभारत काल की पौराणिक कथाओं को संजोए हुए है और ये बाड़ादेव की आस्था भरी पौराणिक कथाएं लोगों के जीवन में भी अपना अलग महत्व रखती हैं। एक जनश्रुति के अनुसार कहा जाता है कि आषाढ़ में आयोजित होने वाले बाड़ीधार मेले में पांडवों और भोले शंकर के मिलन का भव्य आयोजन होता है।
मान्यता है कि बाड़ीधार मेले में जो श्रद्धालु आता है देव उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मेले की पूर्व संध्या पर इस स्थान पर जागरण भी होता है। एक कथा के अनुसार पांडव जब अपने अज्ञातवास में विभिन्न जगहों पर गुफा व कंदराओं में अपने आप को छुपाते फिर रहे थे तो देवभूमि में भोले शंकर को ढूंढते हुए हिमाचल की पावन धरा पर पहुंच गए। हिमालय भोले शंकर पर का स्थान है व पौराणिक ग्रंथों में ऐसा वर्णन है। माना जाता है कि जैसे ही पांडवों को पता चला कि बाड़ी की धार पर्वत पर शिवजी की धुन बज रही है तो शिवजी के दर्शन की इच्छा लेकर वहां गए। दो दिन तथा तीन रात वहां प्रतिदिन जाते रहे।
पांच पांडव बाड़ा देव मंदिर बाड़ीधार। संवाद