उच्चन्यायालय में जाने तैयारी, 31 मार्च के बाद बैंक के मर्ज की प्रक्रिया हो शुरू
बैंक ने छह माह में नहीं की कोई रिकवरी, डिफाल्टरों के चैक भी हो गए बाउंस
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। पूर्व मंत्री व शेयर होल्डर व खाता धारक फोरम के सलाहकार महेंद्र नाथ सोफत ने आरोप लगाया कि बघाट बैंक प्रबंधकों ने आंख पर पट्टी बांधकर शराब कारोबारियों तक को लोन बांट दिए। इन्हें लोन बांटते समय किसी भी चीज की जांच नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इसी तरह अन्य लोन भी बिना किसी जांच के बांट दिए। इस कारण बैंक की हालात लगातार खराब हो रही है और एनपीए बढ़ता चला गया है। अप्रैल में बैंक में कैपिंग लगे छह माह पूरे हो रहे हैं। इस अवधि में न तो बैंक ने कोई रिकवरी की है और न ही प्रशासन ने कोई पुख्ता कदम उठाया है। भ्रष्टाचार में संलिप्त कर्मचारियों तक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब चिंता बढ़ती जा रही है और अब फोरम के सदस्यों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का मूड बना लिया है।
फोरम के सदस्यों ने बुधवार को पत्रकारवार्ता में बघाट बैंक को घाटे तक पहुंचाने वाले कर्मचारियों समेत प्रशासन को खूब कोसा। साथ ही बैंक पर कई आरोप लगाए। पूर्व मंत्री ने कहा की बैंक में चल रहे घोटालों पर 59 केस का प्रतिवेदन एआरसीएस को सौंपा था। इसमें लगाए गए सभी आरोप जांच में सच साबित हुए हैं। इस जांच में खुलासा हुआ कि बैंक की हर फाइल में घोटाला चला हुआ है। वहीं, आरबीआई ने भी कैपिंग लगा दी। छह माह में कोई भी कारगर कदम बैंक ने नहीं उठाया है। हैरत तो ये है कि जो डिफॉल्टरों को समन भी भेजा गया उसमें कोई गिरफ्तारी तक नहीं हुई। डिफाल्टरों ने बचाव करते हुए चेक तो दिए, लेकिन वे बाउंस हो गए। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। बघाट बैंक के मामले अब प्रबंधन समेत जिला प्रशासन, आरबीआई और एआरसीएस भी दोषी है, जो कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। वहीं, बैंक ने हाल ही में वार्षिक आमसभा भी आयोजित की।
इसमें न तो शेयर धारक आए और न ही कई अन्य लोग पहुंचे। इस कारण बैठक का कोरम तक पूरा नहीं हो सका। बैंक लोगों के अब अविश्वास का प्रतीक बन गया है, जबकि प्रबंधन शेयर धारकों के बैठक में न आने पर अपने ताने बाने बुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि एजीएम में साफ कहा गया कि बैंक ठीक से कार्य नहीं कर रहा है। एजीएम में नाहन, ऊना, कांगड़ा और एक्सटेंशन काउंटर रबौण को बंद करने के लिए कहा गया था। इसी के साथ ऑडिट करवाने की भी मांग की गई थी।
साथ ही ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया था जो बैंक के लोन मामले में दोषी पाए जा रहे हैं। इसमें अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार करने के जुर्म में कार्रवाई करने के लिए मांग की गई, लेकिन एजीएम में दिए आश्वासन भी पूरे नहीं हुए हैं। वहीं, अब सरकार से आग्रह किया है कि विशेष जांच दल से बैंक में घोटालों की जांच की करवाई जाए। साथ ही 31 मार्च तक यदि बैंक की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती है तो अब मर्जर की तरफ ध्यान दिया जाए।
कहा,
रिटायरमेंट के दौरान मिलने वाली सुविधाएं रोकी जाएं
शेयर होल्डर व खाताधारक फोरम ने कहा कि बैंक घाटे में चला हुआ है, लेकिन अभी भी बैंठकों के लाखों रुपयों के बिल क्लेम हो रहे हैं। ऐसा पूरी तरह से बंद होना चाहिए। जब तक घाटे से बैंक नहीं उबरता है, तब तक रिटायमेंट के दौरान कर्मचारियों की मिलने वाली सुविधाएं होल्ड कर दी जाएं।