तमाम सियासी उठापटक और अटकलों के बाद नगर परिषद बद्दी अब शहवासियों को हाउस टैक्स के भारी भरकम बिल थमाने वाली है।
- फोटो : demopic
तमाम सियासी उठापटक और अटकलों के बाद नगर परिषद बद्दी अब शहवासियों को हाउस टैक्स के भारी भरकम बिल थमाने वाली है। हाउस होल्ड और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की टैक्स गणना पर उठे सवालों के बाद सभी नौ वार्डों में टैक्स देने वालों का खाका तैयार है। करीब 8000 से अधिक भवन मालिक इस दायरे में है। इस माह के अंत तक बिल थमाने का कार्य शुरू हो जाएगा। नतीजतन नगर परिषद बद्दी के तहत आने वाले शहरवासियों को अब हाउस टैक्स की अदायगी करनी होगी।
बद्दी परिषद ने पहली मर्तबा हाउस टैक्स लगाया है। नगर पंचायत बनने के बाद जल्द ही नप का दर्जा प्राप्त करने वाली नगर परिषद बद्दी ने यह टैक्स सरकार के निर्देशों के बाद लगाया गया। पुरानी परिषदों में शुमार औद्योगिक हब बीबीएन के तहत आने वाली वर्ष 1951 की नप नालागढ़ अभी तक हाउस टैक्स लगाने मेें विफल रही है। बद्दी में परिषद अधिकार क्षेत्र में रहने वाले लोगों को यह टैक्स पहली अप्रैल 2016 से अदा तो करना ही होगा, लेकिन हाउस टैक्स की अदायगी भी एकमुश्त करनी होगी।
हाउस टैक्स लेना परिषद का अधिकार है और हाउस टैक्स के रूप में होने वाली आय से परिषद वार्डों के तहत होने वाले विभिन्न विकास कार्य करवाती है और यह पैसा शहर के विकास कार्यों पर खर्च होता है। अभी तक बद्दी परिषद ने शहरवासियों से इससे मुक्त रखा था। कार्यकारी अधिकारी बद्दी परिषद अजमेर ठाकुर ने कहा कि हाउस टैक्स लगाया जा चुका है। एक माह में मकानों के बिल तैयार किए जाएंगे जिसे आगामी कार्रवाई के लिए प्रेषित किया जाएगा, ताकि हाउस टैक्स की वसूली शुरू हो सके।
यह है टैक्स मूल्यांकन की प्रक्रिया
सरकार द्वारा नोटिफाई की दरों के अनुरूप टैक्स की राशि निकाली जाती है। इसके लिए जमीन और भवन की कीमत को जमा करके इसे 10 फीसदी की दर से भाग किया जाता है और जो दर निकलती है वह रेटेबल वैल्यू होती है। इस वैल्यू में से भी 10 फीसदी को भवन के रखरखाव और अन्य खर्चों को लेकर काटा जाता है। शेष बची धनराशि में से सरकार द्वारा अधिकृत किया गया 7.50 से 12.50 फीसदी की दर से इसे गुणा किया जाता है, जिससे हाउस टैक्स निकलता है। बताया जाता है कि बद्दी में सरकार द्वारा अधिकृत 7.50 फीसदी की दर तय
की है।
सर्वे करके बनाए जा रहे हैं बिल
परिषद के अनुसार शहर के नौ वार्डों में रहने वाले लोगों का सर्वेक्षण करके इनके बिल तैयार किए जाएंगे। इसे आगामी कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। इसके लिए एक माह का समय रखा है और इस अवधि में मकानों के बिल तैयार होंगे। यही नहीं जिन मकान मालिकों ने परिषद में नक्शे पास करवाने के समय हाउस टैक्स की अदायगी कर ली होगी या मकान मालिक हाउस टैक्स दे चुके होंगे, वह इससे बाहर रहेंगे।