बीमारी के कारण खेत हो रहे खाली, जिला में 8,100 हेक्टयेर भूमि पर होती है टमाटर की खेती
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में पहले सूखे की मार झेल रहे किसानों को अब टमाटर की पौध में कमरतोड़ की बीमारी से नुकसान झेलना पड़ रहा है। अभी तक जिला में 20 फीसदी फसल इस रोग के कारण खराब हो गई हैं। कई क्षेत्रों में पौधशाला में ही यह बीमारी पौधों को लग रही है। हालांकि अधिकतर पानी वाले क्षेत्रों में तो किसानों ने पौध खेतों में रोपित कर दी है। इन क्षेत्रों में भी किसान सैकड़ों खराब पौधें खेतों से निकाल रहे है। हालांकि अब बारिश के बाद बीमारी पर कंट्रोल होने की संभावना है। जिला के 8,100 हेक्टयेर भूमि पर टमाटर की खेती होती है। सोलन की मुख्य नकदी फसल टमाटर है। जिला के 90 फीसदी किसान टमाटर पर ही निर्भर है। टमाटर में लग रहे इस रोग से खेतों में पौधों को बचाना मुश्किल हो गया हैं। खेतों में पौधे लगाने के दो दिन बाद ही बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। पहले ही किसान सूखे की मार झेल रहे है। कई क्षेत्रों में तो शिमला मिर्च की पौध में भी यह रोग लग रहा है। उधर, केवीके कंडाघाट की पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती शुक्ला ने बताया कि पौध को तैयार करते समय किसानों को खास सावधानी बरतने की आवश्यकता होती हैं। कमरतोड़ रोग फंफूद के कारण मिट्टी में ही पनप जाता है। इस रोग के चलते किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है। बीमारी के कहर से पौधशाला में उग रही पौध की कमर ही सड़ कर टूट जाती है। इसे कॉलर रोट रोग भी कहते है, इसके उपचार के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड तीन ग्राम प्रति लीटर पानी या मंकोजब 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से सींचे।