नौणी विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं विस्तार परिषद की बैठक में फैसला,
एवोकाडो, कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों पर बढ़ेगा अधिक फोकस
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि ने प्रदेश के किसानों और बागवानों की आय बढ़ाने तथा उन्हें बदलती जलवायु की चुनौतियों से बचाने के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है। विश्वविद्यालय की 28वीं अनुसंधान परिषद और 26वीं विस्तार परिषद की बैठक में किसानों को केंद्र में रखकर नई तकनीकों के प्रयोग पर सहमति बनी। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने की।
बागवानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय अब सेब और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ कीवी, एवोकाडो, बेरीज, नट्स और ड्रैगन फ्रूट जैसी उभरती हुई नकदी फसलों की वैज्ञानिक संभावनाओं का मूल्यांकन करेगा। इसके अलावा लहसुन की खेती, उसके प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ वेस्ट टू वेल्थ पहलों के तहत बायोगैस, बायोचार और पाइन ब्रिकेटिंग पर भी काम तेज किया जाएगा। किसानों की फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए अब एआई आधारित निदान प्रणालियों, मोबाइल परामर्श और तकनीकी वीडियो का सहारा लिया जाएगा। विस्तार निदेशक डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि पिछले 10 महीनों में विवि ने प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के जरिए 33,000 से अधिक किसानों तक पहुंच बनाई है। कुलपति प्रो. बवेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जहां किसान की समस्या अनुसंधान की प्राथमिकता बने। अनुसंधान से निकली तकनीक सीधे खेतों तक पहुंचे।
अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने जानकारी दी कि पिछले 10 महीनों में विवि ने 11.58 करोड़ रुपये के 29 नए रिसर्च प्रोजेक्ट हासिल किए हैं। बैठक में प्रदेशभर के प्रगतिशील किसानों, कृषि व बागवानी अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने भाग लेकर अपने सुझाव साझा किए।