अनट्रेंड मजदूरों को 650 रुपये दिहाड़ी देकर फसल करवाने के लिए किसान मजबूर
बिहार से इस बार नहीं आए मजदूर, किसान परेशान
कंबाइन मशीन पर सरकार से अनुदान देने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बीबीएन में गेहूं की कटाई का कार्य शुरू हो गया है, लेकिन किसानों को कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इस बार बिहार से कटाई के लिए मजदूर नहीं आए हैं। किसानों को फसल की अनट्रेंड मजदूरों से कटाई करवानी पड़ रही है, जो घंटों के हिसाब से काम करते हैं।
बीबीएन में इस बार सात हजार हेक्टेयर जमीन पर गेंहू की फसल लगाई गई है। मैदानी क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा होने से यहां पर गेहूं की अच्छी पैदावार है, लेकिन दून व नालागढ़ के पहाड़ी क्षेत्रों में गेहूं की उपज काफी कम है। पहले बिहार राज्य से गेहूं की कटाई के लिए मजदूर आते थे,, लेकिन अब उत्तर प्रदेश और बिहार में नए उद्योग लगने से मजदूर आने बंद हो गए हैं, इससे किसानों को अनट्रेंड लेबर से गेहूं कटानी पड़ रही है। यह लेबर केवल आठ घंटे कार्य करती है। पहले उन्हें लेने जाना पड़ता है फिर शाम को उन्हें वापस बद्दी लेबर चौक पर छोड़ने जाना पड़ता है। यह मजदूर 650 रुपये दिहाड़ी ले रहे हैं।
नंदपुर के किसान सौढ़ी राम, डूमनवाला गांव के अमर चंद ठाकुर, खेड़ा के राजेंद्र सैणी, श्याम लाल, सनेढ़ के देवेंद्र सिंह, राम गोपाल नेगी ने बताया कि इस बार बीबीएन के मैदानी क्षेत्र में गेहूं की पैदावार काफी अच्छी है। अंधड़ व बारिश के चलते गेहूं जमीन पर नहीं बिछी और न ही गेहूं में कोई रोग लगा, लेकिन कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे। किसानों ने छोटी कंबाइन मशीन पर अनुदान देने की सरकार से मांग की है। मशीन से कटाई करने पर किसानों को गेहूं बांधने व थ्रेसिंग करने की जरूरत नहीं रहती है। कंबाइन में ढाई से तीन हजार रुपये किले खर्च आता है, जबकि थ्रेसिंग करने के लिए पहले गेंहू की कटाई करनी पड़ती है। उसके बाद उसे बांधना पड़ता है। बाण भी अब 40 रुपये किलो हो गया है। थ्रेसिंग करने पर 11 कनस्तर मालिक के और 12वां कनस्तर थ्रेसिंग करने वाले का होता है। एक एकड़ में 12 हजार रुपये खर्चा आता है। इससे उत्पादन लागत काफी बढ़ जाती है।
उधर, कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम और कृषि विकार अधिकारी डॉ. भोपाल ठाकुर ने बताया कि इस बार मैदानी क्षेत्र में गेहूं की पैदावार अच्छी है, लेकिन किसानों को कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे। गेहूं पकने पर अब किसानों को अपनी फसल एकत्रित करने के लिए दिन-रात एक करनी पड़ती है।