आरटीओ के खिलाफ की नारेबाजी, 800 ट्रकों की एनओसी पड़ी है अभी तक लंबितसंवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। बाहरी राज्यों में बिक चुके ट्रकों की एनओसी न मिलने पर स्थानीय ट्रक संचालकों ने रोष जताया। सरकार और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संचालकों का आरोप है कि वर्तमान में ये ट्रक बाहरी राज्यों में सामान ढोने का कार्य कर रहे हैं। इस बीच अगर दुर्घटना हो जाती है तो ये ट्रक स्थानीय लोगों के नाम है तो इसकी भरपाई इन लोगों को ही करनी पड़ेगी। नाम न होने के पीछे चालान बताए जा रहे हैं। कोर्ट में जितने भी चालान हैं वह तो ट्रक बेचने वाले व्यक्ति ने भुगत लिए हैं, लेकिन वाहन चालकों के चालान कोर्ट में भुगतने के बाद भी एप से नहीं हट रहे और ट्रक संचालकों को एनओसी नहीं मिल रही।
वीरवार को इस समस्या को लेकर नालागढ़ में ट्रक संचालकों ने जमकर नारेबाजी की। ट्रक संचालकों का कहना है कि चालान भुगतने के बावजूद भी उन्हें एनओसी नहीं मिल रही। एनओसी न मिलने पर 800 ट्रक संचालक प्रभावित हो रहे हैं। बेचे गए ट्रक खरीदारों के नाम नहीं हो रहे और न ही पुराने ट्रक खरीदने पर स्थानीय लोगों के नाम भी नहीं हो रहे हैं।
ट्रक संचालक सर्वजीत, खमिंद्र, राम चंद, दिग्विजय, सुच्चा सिंह, रिशू, चंदन, सूरज, कमलजीत, ईशान, ज्योति शर्मा, कुलवंत, सरवन, अजय, बलजीत, राजेंद्र व दीपक ने नालागढ़ में एनओसी न मिलने पर जमकर नारेबाजी की। ट्रक चालक खमिंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले पंजाब में अपना ट्रक चार लाख रुपये में बेचा है। उसे खरीदने वाले ने अभी तक पैसा नहीं दिया। वह पहले एनओसी की मांग कर रहा है। बेचे गए ट्रक बिहार व अन्य बाहरी राज्यों में जा रहे हैं। अगर कोई अनहोनी होती है तो उसके जवाबदेह स्थानीय ट्रक संचालक होंगे। यह ट्रक अभी तक उनके नाम चल रहे हैं और इन ट्रकों को संचालक दूसरे लोग कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आरटीओ कार्यालय में चालान न भरने पर उन्हें एनओसी नहीं दी गई है। एनओसी न देने का कारण चालान है, लेकिन उनके ट्रक के जो भी चालान हुए थे वह उन्होंने कोर्ट में भर दिए हैं। इसकी रसीद उन्होंने आरटीओ कार्यालय में दिखा दी है लेकिन हैरानी की बात है कि उसके बावजूद भी उन्हें एनओसी नहीं दी गई है।
उधर, आरटीओ मदन लाल शर्मा का कहना है कि ऑनलाइन जो भी ट्रकों के चालान हुए हैं। उनका संचालन सोलन के ट्रैफिक कार्यालय से होता है। ट्रैफिक कार्यालय में स्टाफ न होने के कारण यह लंबित पड़े हैं। उधर, मोबाइल ट्रैफिक कार्यालय में संपर्क करने पर बताया कि यहां पर जितने भी चालान ऑनलाइन हुए हैं, भुगतान करने पर उन्हें हटा लिया गया है।