युवक इंटक ने निजी स्कूलों के प्रबंधनों के खिलाफ मनमर्जी से फीस बढ़ोतरी और चुनिंदा जगह से वर्दी तथा किताबें खरीदने के लिए बाध्य करने पर मोर्चा खोल दिया है।
सोमवार को निजी स्कूलों के खिलाफ परवाणू से अभियान का आगाज नप परवाणू के समर्थन के साथ करते हुए सहायक आयुक्त शिल्पी बेक्टा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। इसमें निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए कमेटी बनाने और निरीक्षण एवं फीस स्ट्रक्चर तय करने की मांग जोर-शोर से उठाई गई।
वक्ताओं ने कहा कि यह अभियान जिला स्तर तक पहुंचने के बाद प्रदेश स्तरीय आंदोलन के रूप में बदला जाएगा। बाद में सीएम को ज्ञापन सौंपा जाएगा। परवाणू से शुरू किए अभियान के तहत युवा इंटक के राष्ट्रीय महासचिव एवं हिमाचल इकाई के अध्यक्ष यशपाल ठाकुर ने इंटक के प्रांतीय
महासचिव और नप परवाणू के अध्यक्ष ठाकुर दास शर्मा की अगुवाई में सहायक आयुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें अभिभावकों को निजी स्कूलों की मनमर्जी से किए जा रहे आर्थिक शोषण से निजात दिलाने की मांग की गई। इस अवसर पर पार्षद संदीप चौहान और कांग्रेस नेता दिनेश आजाद समेत इंटक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यह लगे हैं आरोप
वक्ताओं ने इस दौरान कहा की प्रदेश में हर साल बड़ी तादाद में निजी स्कूल खुल रहे हैं। इनमें से कई स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें शिक्षा विभाग अथवा सरकार से मान्यता भी प्राप्त नहीं है। उन्होंने निजी स्कूलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि निजी स्कूल अपनी मर्जी से हर साल मासिक फीस में बढ़ोतरी कर देते हैं। यहां तक की हर वर्ष नए बच्चों के साथ साथ पहले से स्कूल में पढ़ रहे बच्चों से भी दाखिला फीस के नाम पर 5 से 25 हजार तक की राशि वसूल कर रहे हैं जोकि सरासर धोखाधड़ी है।
पैसे एेंठने के यह हैं तरीके
आरोप लगाया कि निजी स्कूल प्रबंधनों ने अभिभावकों से पैसे एेंठने के लिए कई तरीके बना रखे हैं। हर माह किसी न किसी तरह की चपत लगती है। फीस की पर्ची में भी कई झोल हैं। निजी स्कूल समय-समय पर अभिभावकों से भवन, पुस्तकालय, वार्षिक समारोह, फोटोग्राफी, प्रयोगशाला और पहचानपत्र आदि के नाम पर राशि वसूल रहे हैं जोकि लूट खसूट से कम नहीं है। अभिभावकों को बच्चों की किताबें, वर्दी आदि सामग्री या तो स्कूल से लेने पर विवश किया जाता है या फिर स्कूल द्वारा तय दुकानों से लेने को मजबूर। यह सामग्री मार्केट रेट से कहीं ज्यादा दामों पर मिलती है।
ट्रांस्पोर्ट के नाम पर तो बख्श दो
आरोप लगाए कि निजी स्कूलों ने बच्चों को स्कूल लाने और घर वापस ले जाने में भी लूट खसोट का तरीका अपना रखा है। स्कूलों ने गाड़ियों की व्यवस्था कर रखी है। नियमों के तहत प्रत्येक स्कूल के पास अपना वाहन होना अनिवार्य है लेकिन अधिकतर स्कूलों ने निजी वाहन हायर कर रखे हैं जो न केवल नियमों का उल्लंघन करते हैं बल्कि अपनी मर्जी से किराया वसूल करते हैं। आरोप लगाया की निजी स्कूलों की मनमर्जी की वजह से ही आम लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा नहीं पा रहे हैं और जो पढ़ा रहे हैं उनका जमकर आर्थिक शोषण हो रहा है।
सामाजिक संगठन भी विरोध में उतरे
इससे पहले सोलन में डीवाईएफआई और स्थानीय लोग मिलकर निजी स्कूल प्रबंधनों के खिलाफ मोरचा खोल चुके हैं। डीसी सोलन को सौंपे ज्ञापन में निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने और मनमाने तरीकों से फीस वसूल करने का गोरखधंधा करार देते हुए शिकंजा कसने की मांग की थी। इस विरोध में हस्ताक्षर अभियान का आगाज भी जल्द सोलन में शुरू किया जा रहा है।