सोलन। आम लोगों के लिए मुसीबत बन चुके फोरलेन निर्माण कार्य पर प्रशासन भी गंभीर हो गया है। लोगों को पेश आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए डीसी ने फोरलेन निर्माता कंपनी और एनएचएआई के अधिकारियों के साथ बैठक करने का फैसला किया है। यह बैठक इसी माह होगी। बैठक में मुख्य रूप से हाईवे पर उड़ती धूल, ग्रामीणों के पेयजल स्रोत और संपर्क मार्ग मुख्य रूप से चर्चा में रहेंगे। इसके अलावा प्रशासन फोरलेन के कार्य को तय समय पर निपटाने की तैयारियों पर भी चर्चा करेगा।
फोरलेन निर्माण के चलते लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। इस पर एनएचएआई परामर्श टीम ने खामियों के चलते कंपनी को नोटिस भी जारी किया है। इसमें हाइवे पर धूल-मिट्टी उड़ने को मुख्य रूप से केंद्रित किया है। दोपहिया वाहन चालकों को नेशनल हाइवे पर सफर करना मुश्किल हो गया है। पानी का छिड़काव न होने की वजह से मार्ग से उड़ती धूल स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों के साथ ही हादसे को भी न्यौता दे रही है। इसके अलावा निर्माण कार्य से ग्रामीणों के रास्ते और पानी के स्रोत भी बर्बाद हो गए हैं। प्राकृतिक पेयजल स्रोत निर्माण की भेंट चढ़ गए हैं। सोलन से परवाणू तक कई पंचायतों के लोग अनगिनत समस्याओं से जूझ रहे हैं। एनएचआईए के नोटिस जारी करने के बाद अब प्रशासन भी इस दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है।
समस्या खत्म होगी, काम चलता रहेगा : डीसी
डीसी हंसराज शर्मा ने कहा कि फोरलेन पर आम लोगों को आ रही समस्याएं दूर की जाएंगी। इसके साथ ही इस बात पर भी ध्यान दिया जाएगा कि फोरलेन का निर्माण कार्य निर्धारित अवधि में पूरा हो। उन्होंने कहा कि इसके लिए इसी माह बैठक बुलाई जाएगी जिसमें फोरलेन निर्माता कंपनी और एनएचएआई के अधिकारी मौजूद रहेंगे।
लोगों की सुविधा से समझौता नहीं : दरोच
एनएचआईए परामर्श टीम के प्रभारी प्रकाश दरोच ने कहा कि फोरलेन निर्माता कंपनी को पैच वर्क और पानी के छिड़काव के निर्देश दिए हैं। लोगों की असुविधा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। कंपनी नियम कानून से बाहर नहीं है। यदि कोई गलती होती है तो कंपनी प्रबंधन के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी। कंपनी को जारी नोटिस का जवाब एक सप्ताह में देना होगा।
तय अवधि में काम पूरा होने पर संशय
परवाणू से सोलन (चंबाघाट) तक निर्मित हो रहे फोरलेन के प्रथम चरण का कार्य वर्ष 2018 तक पूरा किया जाना है। निर्माता कंपनी ने इसे दो साल आगे बढ़ाने की गुजारिश की है। इसमें बरसात के दौरान हुए नुकसान का हवाला दिया है। साथ ही कुमारहट्टी और धर्मपुर के बीच सैन्य क्षेत्रों में आने वाली जमीन के अधिग्रहण में देरी को भी कारण बताया है। करीब 39 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 748 करोड़ रुपये खर्च होने हैं लेकिन इसका तय समय में पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है।