फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉक्टरों की पोस्टमार्टम में ड्यूटी, रोगियों का नहीं हो रहा उपचार

विज्ञापन
काउंटर पर लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो

विज्ञापन

सोलन।
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन को चिकित्सकों की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ ही जिला भर से आ रहे शवों का पोस्टमार्टम भी करना पड़ रहा है। महज 21 डॉक्टरों के सहारे डेढ़ हजार की ओपीडी निपटा रहे अस्पताल में हर दूसरे दिन पोस्टमार्टम के मामले पहुंच रहे हैं। आलम ये है कि पूरे जिले में नेशनल हाइवे पर हादसे में किसी की जान जाती है तो शव को सोलन अस्पताल भेज दिया जाता है।

कंडाघाट और धर्मपुर में बड़े स्तर के अस्पताल और डॉक्टरों के प्रबंध के बावजूद पोस्टमार्टम नहीं किए जा रहे हैं। नालागढ़ और बद्दी से भी कई बार पोस्टमार्टम के लिए शवों को सोलन अस्पताल भेजा जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल में इस समय महज दो एमबीबीएस चिकित्सक हैं। जबकि अन्य सभी विशेषज्ञ चिकित्सक अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं।
विज्ञापन


पोस्टमार्टम की स्थिति में अस्पताल प्रबंधन को विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती भी कई बार पोस्टमार्टम करने के लिए करनी पड़ती है। ऐसे में चिकित्सक ओपीडी छोड़कर पोस्टमार्टम करना पड़ता है। इसकी वजह से मरीजों को परेशानी पेश आ रही है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेश गुप्ता का कहना है कि लगातार पोस्टमार्टम के केस आने से परेशानी पेश आ रही है। डॉक्टरों को व्यस्त शेड्यूल छोड़कर पोस्टमार्टम करना पड़ता है। इससे बाकी मरीजों को दिक्कत होती है। कंडाघाट, धर्मपुर के अलावा परवाणू और कई बार नालागढ़ व बद्दी से भी पोस्टमार्टम के मामले सोलन भेज दिए जाते हैं। पिछले दिनों अस्पताल के डॉक्टरों को एक दिन दस पोस्टमार्टम करने पड़े थे। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों को अपना पोस्टमार्टम कक्ष और मुर्दाघर बनाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन अस्पताल अभी तक इस पर अमल नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन


वीआइपी ड्यूटी ने भी रुलाए मरीज
शिमला-चंडीगढ़ हाइवे पर बसे होने की वजह से सोलन में लगभग रोजाना ही राज्य अतिथि और वीआईपी का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में किसी भी राज्य अतिथि के आने पर सोलन अस्पताल से एमडी को उसकी ड्यूटी में लगाने के निर्देश जारी हो जाते हैं। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन को विशेषज्ञ चिकित्सक को राज्य अतिथि की देखभाल में भेजना पड़ता है। इसकी वजह से अस्पताल में मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। जो मरीज एमडी से चेकअप के लिए दूरदराज से आए होते हैं उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें