मत उलझ तू यूं मुझसे ए उलझन, नहीं मुझसे तू पार पाएगी, पर बजी तालियां
सोलन में मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। भाषा एवं संस्कृति विभाग सोलन की ओर से पुराने उपायुक्त सभागार में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार और लेखक रत्न चंद निर्झर ने की। इस मौके पर सोलन के लेखकों और साहित्यकारों ने 30 नवंबर को हो रही रत्न चंद निर्झर की सेवानिवृत्ति पर उन्हें बधाई दी। जिला भाषा अधिकारी सोलन कुसुम संघाइक ने इस मौके पर टॉपी व शॉल भेंट कर उनका सम्मान किया। इस मौके पर कवियों ने कविता पाठ किया। सोलन के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रेमलाल गौतम शिक्षार्थी ने अविरल मोदमयी तव तान, झर-झर कर निर्झर अलंकृत गान प्रस्तुत किया। हेमंत अत्री ने अपने भाव कुछ इस तरह प्रकट किए-मर्म स्पर्शी काव्य बहता, उनकी लेखनी से झरझर मधुभाषी, साहित्य अभिलाशी, ये हैं प्यारे रत्न चंद निर्झर। रतन ठाकुर ने फरमाया मत उलझ तू यूं मुझसे ए उलझन, नहीं मुझसे तू पार पाएगी। केआर कश्यप ने कोई यूं ही नहीं बन जाता अपराधी, कोई यूं ही नहीं कर देता अपनी बर्बादी कविता के माध्यम से कैदियों की पीड़ा का काव्य बखान किया। ममता ठाकुर ने रिश्तों पर अपनी कविता पढ़ी, रिश्ते तो पूरी किताब है जिंदगी की, गलतियां तो एक पन्ना है जिंदगी का, इसके अलावा निधि वर्मा ने कुछ इस तरह से था वो सफर कुछ यादें थी कुछ नया था कविता पढ़ी। ठाकुर रामलाल राही ने सिरमौर सा तुझको रचा था विश्व में कतार में, आकृष्ट था सबको किया तेरे मधुर व्यवहार ने। इसके अलावा डॉ. अशोक गौतम, यशपाल कपूर, प्रवीण कुमार, चंद्र, नीलम, सत्येन, निधि, दीपिका, अशोक गौतम, एमएल गुप्ता, सुरेश चंद बटोही, बीएन गुप्ता, डॉ. उमादत्त भट्ट, बेलीराम आजाद ने भी कविता पाठ किया।