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नालागढ़ में ग्रीन लैंड एरिया में दुकानें बनाने पर हाईकोर्ट सख्त

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नालागढ़ में ग्रीन लैंड एरिया में दुकानें बनाने का मामला
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मुख्य सचिव को दिए अवैध निर्माण हटाने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नालागढ़ (सोलन)। उपमंडल नालागढ़ में एक आवासीय कॉलोनी के इर्द गिर्द छोड़े ग्रीन लैंड (हरित क्षेत्र) पर दुकानें बनाने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने मामले की शिकायत आने के बाद उस समय के जिम्मेदार अधिकारियों की सूची तलब की है। साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले की शिकायत उठने के बाद गठित एसआईटी की रिपोर्ट भी मांगी है।
एसआईटी ने 2014 में कुल 57 पृष्ठ की रिपोर्ट तैयार की थी। अब हाईकोर्ट ने पूछा है कि 2014 में एसआईटी की रिपोर्ट सौंपने के बाद से अब तक जिम्मेदार और निर्णय लेने में सक्षम अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? हाईकोर्ट ने 25 जून को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव को अवैध रूप से बनाए गए भवनों को गिराने के आदेश देने की बात कही है। नालागढ़ में बनी यह कॉलोनी कुल 31 बीघा में फैली है। नियम के अनुसार कुल जमीन का दस प्रतिशत भाग ग्रीन लैंड के तौर पर पार्क के लिए छोड़ना होता है। इस कॉलोनी के इर्द-गिर्द तीन पार्क बनने प्रस्तावित थे लेकिन अब इन पार्कों की जगह करीब 62 दुकानें बन चुकी हैं। इस संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसे लेकर हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निर्णय लिया है। लोगों के मुताबिक हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद इस मामले में कड़ी कार्रवाई होने की उम्मीद है। धड़ाधड़ निर्माण कार्यों के चलते नालागढ़ में हरित क्षेत्र सिकुड़ता जा रहा है। हालांकि प्रशासन शहर में पौधारोपण अभियान भी चला रहा है। इसमें लाखों की तादाद में पौधे रोपे जाएंगे। इस बीच हाईकोर्ट द्वारा कसे शिकंजे से शहर के हरित क्षेत्र में इजाफा होने की उम्मीद है।
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बीबीएनडीए के सीईओ केसी चमन ने कहा कि अदालत ने जो जानकारी मांगी थी वह प्रस्तुत कर दी है। यह कालोनी नप के अधीन आती है। इस मामले को लेकर अब सुनवाई नौ जुलाई को होगी।
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