परवाणू (सोलन)। पानी को लेकर परवाणू के दो गांवों के बीच टकराव हो गया है। नौबत धरना-प्रदर्शन तक पहुंच गई है। सोमवार को पेयजल स्रोत से छेड़छाड़ से आहत टकसाल के ग्रामीणों ने सहायक आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना दिया। लोगों ने अंबोटा के ग्रामीणों पर पेयजल योजना को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने बताया कि अंबोटा के ग्रामीणों ने पेयजल योजना का पानी अपने गांव के साथ जोड़ लिया है। इसके चलते टकसाल में पानी के लिए हाहाकार मच गया है और लोग पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
टकसाल के लोगों का कहना है कि इस बारे विभागीय अधिकारियों को सूचित कर दिया है लेकिन विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। टकसाल पंचायत के प्रधान अमरनाथ शर्मा ने कहा कि आईपीएच विभाग की जानकारी में यह सारा मामला है। दोनों पक्षों के बीच इस बात को लेकर समझौता हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस स्कीम का पानी अंबोटा की जमीन को लगता है। टकसाल गांव को भी पौना इंच पाइप के जरिये पानी दिया जा रहा है।
पचास दशक पुरानी है यह स्कीम
टकसाल में पेयजल स्कीम वर्ष 1966-67 में पैड़ी की नाल (नजदीक आणनु) से टकसाल तक सरकार और यहां के गांववासियों के सहयोग से शुरू की थी। इस स्कीम को गांव के लोग वर्ष 1993-94 तक अपने स्तर पर बिना विभागीय कर्मचारी के ही चलाते रहे। स्कीम को शुरू करने व चलाने में आसपास के गांव के किसी भी व्यक्ति को कोई आपत्ति नहीं थी। धीरे-धीरे टकसाल की आबादी बढ़ने पर यहां के निवासियों ने पंचायत के माध्यम से इस स्कीम को पूर्ण रूप से सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के सुपुर्द वर्ष 1993-94 में कर दिया था।
ये हैं आरोप
ग्राम सुधार सभा टकसाल के प्रधान ओम दत्त शर्मा, सचिव वीरेंद्र कश्यप, बीडीसी सदस्य हेमंत कुमार, टकसाल के उपप्रधान कमल कुमार, चाणक्य, अमर दास गिल, उदय राम भाटिया, सुखदास भाटिया, गोपाल, दुनीचंद धीमान, भगवान दास, रणवीर सिंह, सुभाष भाटिया, वीरेंद्र कुमार और संजीव कुमार ने बताया कि गांव अंबोटा के लोगों ने सामूहिक तौर पर इकट्ठे होकर इस स्कीम से छेड़छाड़ की है। पानी को अपने गांव अंबोटा के लिए जोड़ दिया है। यह गांव अंबोटा की स्कीम है। उनका कहना है कि सरकारी कार्य में रुकावट पैदा करना और पानी को बंद करने पर भी विभाग द्वारा कोई ऐक्शन नहीं लिया जा रहा है।
पानी के लिए बनी थी सहमति : शर्मा
टकसाल पंचायत के प्रधान अमरनाथ शर्मा ने कहा कि मौखिक तौर पर यह सहमति बनी थी की अंबोटा गांव को जब जरूरत पड़ेगी तो इस स्कीम से पानी लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है वो आईपीएच विभाग की जानकारी में है।