सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल के ऑर्थो वार्ड के महिला शौचालय में ताला लटका है। इस कारण यहां दाखिल दोनों ही वर्ग के मरीजों को एक शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल के इस वार्ड में दो-दो शौचालय हैं। लेकिन इन दिनों इनमें से एक-एक शौचालय बंद कर दिया है। मरीजों को या तो कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है या फिर उन्हें सीढ़ियां उतरकर दूसरे वार्ड में पहुंचना पड़ेगा। ऑर्थो वार्ड में ज्यादातर ऐसे मरीज दाखिल हैं जो अच्छे से चल-फिर भी नहीं सकते हैं। इन्हें दूसरे के सहारे की जरूरत हर समय रहती है। लेकिन इसके बावजूद ऑर्थो वार्ड के साथ ही मरहम-पट्टी कक्ष के पास मरीजों के बैठने के लिए बैंच तक नहीं लगाए गए हैं।
अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही ने सभी मरीजों को आफत डाल दिया है। मरीजों के साथ-साथ तीमारदार भी खासे परेशान हो रहे हैं। वार्ड में जिस एक शौचालय को खोला गया है उसके बिल्कुल पास ही मरीज के बिस्तर लगे हैं। इन्हें बदबू झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल में ऑर्थो वार्ड के साथ ही मरहम-पट्टी कक्ष की हालत भी नाजुक बनी हुई है। यहां मरहम-पट्टी करवाने पहुंचने वाले मरीजों को वार्ड के बाहर खड़े रहकर डॉक्टर की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। मरीजों को बैठने के लिए कोई प्रबंध नहीं हो पाया है। सुबह के समय आए मरीज पूरा दिन खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन की ओर से यहां सिर्फ एक बैंच लगाया है जिस पर एक समय में तीन ही मरीज बैठ सकते हैं। यहां रोजाना 25 से 30 मरीज मरहम-पट्टी करवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
जल्द निकालेंगे हल : एमएस
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेश गुप्ता ने कहा कि मरीजों ने इस तरह की समस्या कभी प्रबंधन को नहीं बताई। यदि मरीज उनके पास आकर शिकायत करते तो यह समस्या पहले ही हल हो चुकी होती। अब समस्या उजागर हो चुकी है तो इसके समाधान का प्रयास किया जाएगा। कहा कि एक या दो दिन में शौचालय को खुलवा दिया जाएगा और मरीजों को बैठने के लिए बैंच लगाए जाएंगे।
उपाय ढूंढे अस्पताल प्रबंधन : अमीना
ऑर्थो वार्ड में दाखिल राजगढ़ की अमीना ने कहा कि एक ही शौचालय होने से उन्हें परेशानी हो रही है। कई बार शौचालय में पुरुष चले जाते हैं तो असुरक्षा की भावना जागृत होती है। अस्पताल प्रबंधन को उपाय खोजना चाहिए।
शौचालय अलग-अलग हों : पद्म देव
पद्म देव ने कहा कि महिला और पुरुष मरीजों को अलग-अलग रखने का प्रबंध किया जाना चाहिए। यदि एक ही वार्ड में दोनों को रखा जा रहा है तो कम से कम शौचालय अलग होने चाहिए। यह तो सबका नैतिक अधिकार है।
एक ही शौचालय से झिझक : विमला
विमला देवी ने कहा कि महिलाओं को अलग शौचालय मिलना जरूरी है। कई बार शौचालय में दाखिल होने से पूर्व झिझक महसूस होती है। शौचालय के बिल्कुल पास बिस्तर लगाया है जिसकी वजह से बदबू आती रहती है।
घायल मरीजों को ज्यादा परेशानी : विशाल
विशाल ने कहा कि शौचालय में यदि कोई चला जाता है तो उन्हें दूसरी जगह जाना पड़ता है। लेकिन उनकी टांग में चोट है और वो ज्यादा चल फिर भी नहीं सकते हैं। ऐसे में सहारा लेकर शौचालय तक पहुंचना मजबूरी बन जाता है।