रेत की खानों में श्रम कानून की जांच करेगा विभाग
खानों में काम कर रही लेबर के पंजीकरण, न्यूनतम वेतन और उनकी सुरक्षा होंगे जांच के मानक 20 से अधिक कामगार पाए जाने पर काटना होगा पीएफ
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। रेत की खानों में जल्द ही श्रम अधिनियम की जांच शुरू होगी। श्रम विभाग बाकायदा टीम बनाकर खानों में दबिश देगा और वहां मजदूरों को मिल रही सुविधाओं की जांच करेगा। इस दौरान कमियां पाई जाती हैं तो खान मालिकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। विभाग ने यह फैसला श्रम अधिनियम के उल्लंघन की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया है।
गौरतलब है कि रेत की खानों में अनगिनत मजदूर काम कर रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर नेपाल के मजदूूर हैं। इन मजदूरों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती हैं। ज्यादातर मजदूरों का पंजीकरण भी नहीं करवाया जाता है। साथ ही खानों में सुरक्षा उपकरणों की भी खासी कमी रहती है, जबकि कंपनी एक्ट में 20 से अधिक कामगार होने पर उनका पंजीकरण और पीएफ काटा जाना अनिवार्य है। इसके अलावा यदि मजदूरों की संख्या दस है तो उन्हें अन्य वित्तीय नियमों के तहत लाभ मिलने आवश्यक हैं, जबकि न्यूनतम वेतन जिसमें अप्रशिक्षित और प्रशिक्षित श्रेणी अलग-अलग शामिल हैं, का भी पालन होना अनिवार्य है, लेकिन रेत की खान में यह नियम पूरे हो रहे हैं या नहीं इसके लिए विभाग विशेष अभियान चलाएगा। श्रम निरीक्षक ललित ठाकुर ने बताया कि रेत की खानों में श्रम अधिनियम लागू हैं। यदि बीस से अधिक लोग काम कर रहे हैं तो यह कंपनी एक्ट में पंजीकृत होंगे और श्रमिकों का पीएफ काटना भी अनिवार्य है। विभाग इस मामले की जांच करेगा और जो लोग पंजीकृत नहीं पाए जाते हैं उनके मालिकों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि यह अभियान जल्द ही शुरू किया जाएगा।
खनन के खिलाफ चलेगा हस्ताक्षर अभियान : रत्न ठाकुर
रेत की खान मालिकों के खिलाफ सोलन शहर में जल्द ही हस्ताक्षर अभियान छेड़ा जाएगा। आवाम की आवाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रत्न ठाकुर ने बताया कि रेत की खानों से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। वे इसके लिए सोलन शहर में हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे और इसकी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जाएगी। यह अभियान मालरोड पर एक पोस्टर के माध्यम से छेड़ा जाएगा। जिसमें रेत की खानों से होने वाले नुकसान का जिक्र होगा और लोगों से आह्वान किया जाएगा कि वे इस पर हस्ताक्षर कर इस अभियान में हिस्सा बनें।