रेत की खानों में हो रहा अवैज्ञानिक खनन, भूस्खलन का बढ़ा खतरा
सोलन के आसपास खनन के दौरान बेंच बनाने के निर्देशों का उल्लंघन, लगातार खनन पर विभाग लाचार
जिला मुख्यालय में चल रहीं एक दर्जन रेत की खानें, नियम मानने की शर्त पर ही विभाग देता है इजाजत
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। बाकायदा सरकारी मंजूरी लेकर पहाड़ खोदने वाले इन्हें लावारिस छोड़ गए हैं। करीब 20 साल पुरानी रेत की खानें अब ढलान बन चुकी हैं। यहां अवैज्ञानिक तरीके से हुआ खनन कभी गंभीर संकट पैदा कर सकता है। खनन विभाग ने जिन भी ठेकेदारों को खनन की इजाजत दी थी, उनसे खनन के बाद पहाड़ के हालात बेहतर करवाने का प्रयास कभी नहीं किया। न ही ऐसे ठेकेदारों को नोटिस जारी हुए जिन्होंने पांच साल तक खूब खुदाई की और फिर पहाड़ को प्रकृति के हवाले कर दिया। सालों से जारी इस कारनामे पर खनन विभाग भी लगातार पर्दा डालता आ रहा है। सोलन में इस समय करीब एक दर्जन रेत की खानें चल रही हैं। इन सभी को विभागीय मंजूरी मिली हुई है। खनन विभाग बाकायदा ठेकेदारों से रॉयल्टी वसूल करता है। खनन के दौरान जो रेत निकलती है, उसका पूरा हिसाब रखा जाता है। हालांकि, विभाग और ठेकेदार के बीच अनुबंध खत्म होने के बाद पहाड़ को सुरक्षित करने की कोई पहल नहीं हो पा रही है। रेत की ज्यादातर खानों में हालात एक जैसे ही बने हुए हैं। बसाल में पिछले करीब ढाई दशक से खनन का कार्य जारी है। हालांकि, यह खनन निजी भूमि पर किया गया है लेकिन खनन के लिए विभाग से मंजूरी ली गई थी। विभाग ने अपनी शर्तों पर ही ठेकेदारों को काम शुरू करने दिया। इसमें पहाड़ खोदने के बाद बेंच बनाने का साफ उल्लेख है। विभाग पहाड़ पर भविष्य में भूस्खलन के खतरे को रोकने के लिए बीच-बीच में बेंच बनाने के निर्देश जारी करता है जिससे पहाड़ के भूस्खलन का शिकार न हो। लेकिन, ज्यादातर खानों में ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है।
एनजीटी में लेकर जाएंगे मुद्दा : रत्न सिंह ठाकुर
आवाम की आवाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रत्न सिंह ठाकुर का कहना है कि वे खान के मुद्दे को जल्द ही एनजीटी में लेकर जाएंगे। नियमों की अनदेखी कर खनन कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। इस तरीके से खनन कार्य किया गया है कि भविष्य में गंभीर खतरा गांव व पहाड़ के नीचे काम करने वाले लोगों पर बना रहेगा। पहाड़ को सीधा काटना या उसमें बेंच न बनाना नियमों का उल्लंघन है। इसमें खनन विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए थी।
भविष्य में नियम न टूटे विभाग दे रहा ध्यान : कुलभूषण
खनन अधिकारी कुलभूषण शर्मा का कहना है कि खनन कार्य कई सालों से हो रहा है। उनका ध्येय सिर्फ भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोकना है। उन्होंने कहा कि खनन के दौरान ठेकेदार को बेंच बनाने के आदेश दिए जाते हैं। निजी भूमि होने की वजह से कई बार ठेकेदार उसे खुद विकसित करने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में ठेकेदार निजी भूमि पर ही खनन कार्य कर रहे हैं। यदि पहाड़ों से लोगों को खतरा है तो वे इसकी शिकायत करें।
देहूंघाट में खनन की शिकायत पर विभाग ने दी दबिश
देहूंघाट में खनन कार्य पर रोक के बावजूद काम चले होने की सूचना मिलते ही खनन विभाग की टीम ने सोमवार को दबिश दी। हालांकि मौके पर पहुंची टीम के हाथ कुछ भी नहीं लग पाया। जिस समय टीम दबिश देने पहुंची, खान में न तो मजदूर मिले और न ही मशीनें चली हुई पाई गईं। खनन अधिकारी कुलभूषण शर्मा ने बताया कि देहूंघाट में खान को बंद कर दिया गया है। यदि कोई वहां काम करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।