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सैंपल फेल वाली फार्मा कंपनियों पर गिर सकती है गाज

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बद्दी (सोलन)। दवाओं के बार-बार सैंपल फेल होने पर केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने फार्मा उद्योगों पर शिकंजा कस दिया है। दवा उद्योगों को इस बाबत नोटिस जारी कर उनके उत्पादों के लाइसेंस कुछ समय के लिए निलंबित किए हैं। गुणवत्ता में सुधार नहीं होता है तो लाइसेंस रद्द भी किए जा सकते हैं।
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सीडीएससीओ हर माह ड्रग अलर्ट जारी करता है। इसमें लगातार कुछ फार्मा उद्योगों की दवाएं गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतर रहीं। ऐसी फार्मा कंपनियों पर सरकार अब नकेल कसने जा रही है। जनवरी में देश भर से 31 जीवन रक्षक दवाएं गुणवत्ता के मानकों पर सही नहीं उतरी थीं। इसमें हिमाचल की 10 दवाएं शामिल हैं। इसमें दिल, बुखार, दर्द, गैस, उल्टी, दांतों, सर्दी जुकाम, शूगर, हड्डियों और कानों की दर्द आदि की दवाएं शामिल हैं। नौ मार्च को जारी ड्रग अलर्ट में 39 दवाईयों के सैंपल फेल हुए थे। इसमें भी प्रदेश की 14 दवाईयां मानकों पर खरी नहीं उतरीं थीं। इस बार खासकर बच्चों और महिलाओं की दवाईयां की गुणवत्ता सही नहीं पाई गई हैं। अलर्ट में टीबी, मलेरिया, गैस, उल्टी, दर्द और एलर्जी, पेट संक्रमण और सांस की बीमारी की दवाइयों के सैंपल फेल बताए गए हैं। ड्रग विभाग ने बाजार से इन दवाओं के संबंधित बैच के स्टॉक को हटवा दिया था।
स्वास्थ्य एवं विनियमक विभाग ने राज्य दवा नियंत्रक बद्दी को निर्देश जारी किए हैं कि जल्द ऐसे फार्मा उद्योगों की सूची बनाएं जिनकी दवाओं के सैंपल नियमित तौर पर फेल हो रहे हैं। इसमें सैंपल फेल होने के कारणों का जिक्र भी करना होगा। सूत्रों का कहना है कि विभाग की नजर ऐसी दस कंपनियों पर है जिनके उत्पादों के सैंपल बार-बार फेल हो रहे हैं। इनके प्रोडक्ट लाइसेंस तक रद्द हो सकते हैं।
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सुधार नहीं किया तो होगी कार्रवाई : मारवाह
राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने कहा कि प्रदेश में उन सभी दवा उद्योगों को नोटिस जारी कर दिए हैं जिनके उत्पाद मानकों पर खराब पाए गए हैं। इनके उत्पाद लाइसेंस कुछ समय के लिए निलंबित किए हैं। यदि दवाओं की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं किया गया तो ऐसी कंपनियों केे लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।
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