सोलन।
निजी शिक्षण संस्थानों में मनमर्जी के खिलाफ अभिभावक उग्र होने लगे हैं। लेकिन शिकायतें शिक्षा विभाग तक नहीं पहुंच रही हैं। बच्चों की पढ़ाई और बढ़ती फीस से चिंतित अभिभावक आपसी मनमुटाव के बाद भारी-भरकम फीस अदा करके बच्चों को उसी स्कूल में पढ़ा रहे हैं।
सोलन जिले में अभी तक शिक्षा विभाग के पास फीस बढ़ोतरी या निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर कोई लिखित शिकायत नहीं पहुंची है। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि कोई अभिभावक इस संबंध में शिकायत देता है तो उस तत्काल कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निजी स्कूल में दस से बीस प्रतिशत तक फीस बढ़ोत्तरी की गई है। इसके अलावा बिल्डिंग फंड और दाखिला फीस भी वसूल की जा रही है। शहर के कुछ नामी स्कूलों की हालत तो यह है कि नर्सरी के बच्चों की फीस भी पांच से 25 हजार रुपये तक तय की गई है। इसके अलावा पुस्तकों का भारी-भरकम बोझ बच्चों पर लादा जा रहा है।
गैर जरूरी पुस्तकों को खरीदने के निर्देश अभिभावकों को दिए गए हैं। पुस्तक विक्रेताओं से सांठगांठ कर स्कूल प्रबंधन मोटी कमाई कर रहे हैं। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग ने स्कूल में किसी भी तरह की पुस्तकें बेचने पर मनाही कर रखी है। इसके चलते अब स्कूल प्रबंधन पुस्तक विक्रेताओं के माध्यम से स्कूल की पुस्तकें बिक्री कर रहे हैं। जबकि शिक्षा विभाग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। अभिभावकों राजकुमार, रमेश चंद, संजय सिंह व प्रकाश चंद ने बताया कि बच्चे को पढ़ाना मजबूरी है। इसके लिए हर साल फीस बढ़ोतरी सहनी पड़ती है। आवाज उठाएं तो स्कूल प्रबंधन बच्चे को स्कूल से निकालने की धमकी देते हैं। ऐसे में भविष्य बर्बाद होने की चिंता की वजह से अभिभावक चुप रहना ही बेहतर समझने लगे हैं।
लिखित शिकायत नहीं करते अभिभावक : पूनम सूद
उच्च शिक्षा उपनिदेशक पूनम सूद का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी की मौखिक तौर पर तो बातें उठती हैं। किसी भी अभिभावक ने अभी तक लिखित रूप में शिकायत नहीं की है। यदि एक भी लिखित शिकायत विभाग को मिलती तो संबंधित स्कूल के खिलाफ जांच बैठाएंगे। अभिभावक चुपचाप सबक ुछ सहन कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया है कि यदि कहीं कुछ गलत हो रहा है तो वे शिक्षा विभाग से इसकी शिकायत करें।