राशन खरीद घोटाले में नपे जेल वार्डन
पांच साल तक नहीं मिलेगी वेतन बढ़ोतरी
2015 में मांगी गई आरटीआई में हुआ था फर्जी बिल का खुलासा
कारागार महानिदेशक ने जांच के बाद सही पाए आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। आरटीआई में खुलासे के बाद जिला कारागार सोलन में राशन की खरीद-फरोख्त घोटाले में संलिप्त मुख्य वार्डन पर गाज गिर गई है। करीब तीन साल पहले सूचना अधिकार के माध्यम से इस मामले का खुलासा हुआ था। जिसमें लाखों रुपये के राशन में धांधली के आरोप लगाए गए थे। सोलन जेल के मुख्य वार्डन पर फर्जी बिल प्रस्तुत करने का आरोप था। मामले में सोलन के आरटीआई कार्यकर्ता प्रेम सिंह टंगणियां ने बिल के संबंध में जानकारी मांगी थी, लेकिन बाद में जांच-पड़ताल में बिल फर्जी पाए गए।
जांच के लिए यह मामला सहायक आयुक्त को सौंपा गया, लेकिन बाद में मामला संगीन होने की वजह से इसकी जांच का जिम्मा पुलिस महानिदेशक को सौंपा गया। मामले की जांच में आरोपी मुख्य वार्डन पर लगाए गए सभी आरोप सही साबित हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद वार्डन पर कार्रवाई करते हुए उसकी आगामी पांच साल तक सभी वेतन वृद्धियों रोक दी गई हैं। इस बारे में जेल के महानिदेशक सोमेश गोयल की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। सोलन में मामले पर कार्रवाई को आरटीआई कार्यकर्ता प्रेम सिंह टंगणियां ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई में मिली जीत करार दिया है। उन्होंने बताया कि सोलन जेल में बड़े पैमाने पर राशन की खरीद-फरोख्त में धांधली हुई थी। इसकी जानकारी जब उन्हें मिली तो उन्होंने वर्ष 2015 में सूचना अधिकार के माध्यम से जेल में खरीदे जा रहे राशन की जानकारी मांगी। इस जानकारी में उन्हें बिल प्रस्तुत किए गए। जब इन बिलों की उन्होंने रजिस्टर पर एंट्री जांची तो यह फर्जी पाए गए। इसके बाद उन्होंने इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से कर दी। इस दौरान करीब तीन साल चली जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई के संबंध में एक और आरटीआई मांगी थी। इसके जवाब में जेल महानिदेशक की ओर से उन्हें दी गई जानकारी में जेल वार्डन पर कार्रवाई का खुलासा किया गया है। उन्होंने बताया कि आरटीआई के माध्यम से भ्रष्टाचार उजागर करने का यह पहला मामला है जिस पर इतनी बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है। उन्होंने आरटीआई के बाद हुए खुलासे और उस पर की गई कार्रवाई को सराहनीय कदम बताया है।