सोलन। कालका-शिमला नेशनल हाईवे को फोरलेन में बदलने के लिए चल रहे निर्माण कार्य की जद में आए चंबाघाट ट्रांसपोर्ट नगर उजड़ना शुरू हो गया है। प्रशासन की मोहलत से पहले ही चंबाघाट में मकान गिरने शुरू हो चुके हैं। मकान मालिकों ने कहर से बचने के लिए कीमती सामान को समेटना शुरू कर दिया है। वहीं जिन दुकानों को नोटिस भेजे हैं उनमें भी तोड़फोड़ शुरू हो गई। प्रशासन ने 24 मार्च तक मकानों को खाली करने की समयसीमा तय की है। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होगी और किसी भी मकान या दुकान मालिक को बख्शा नहीं जाएगा। इससे पूर्व धर्मपुर बाजार में फोरलेन की जद में आए बाजार में प्रशासन ने आखिरी समय में जेसीबी की मदद से दुकान और मकान गिरा दिए थे।
आखिरी समय तक कई लोग अपना सामान बाहर नहीं निकाल पाए थे। हालात यह थे कि एक तरफ जेसीबी से दीवारें गिराई जा रही थीं जबकि दूसरी तरफ लोग सामान समेटने में लगे थे। अब चंबाघाट में ऐसी तोड़फोड़ से बचने के लिए मालिकों ने खुद ही कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने चंबाघाट से कंडाघाट तक 300 कब्जाधारकों को नोटिस जारी किए हैं। इन सभी को करीब 60 दिन पूर्व प्रशासन ने नई जगह ढूंढने और मुआवजा राशि हासिल करने के निर्देश दे दिए थे। ज्यादातर कब्जाधारकों ने मुआवजा राशि तो हासिल कर ली है लेकिन कब्जे अभी तक नहीं छोड़े हैं। इसकी वजह से अब प्रशासन ने आखिरी समयसीमा तय कर कब्जे हटाने के लिए सख्ती दिखाने का फैसला कर लिया है।
24 मार्च तक खाली करने होंगे कब्जे : एसडीएम
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने बताया कि सभी कब्जाधारकों को 24 मार्च तक कब्जे छोड़ने होंगे। प्रशासन ने तय नियमों के अनुसार नोटिस जारी किए हैं। इसमें जितने मकान या दुकान फोरलेन की जद में आ रहे थे उन्हें मुआवजा भी प्रदान किया है। ऐसे में समय रहते कब्जाधारकों को फोरलेन के लिए चयनित जमीन से हटना ही होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
यहां खुद तोड़ रहे हैं लोग
अपने सपनों को आशियानें
300 परिवारों के पास आंसु बहाने का वक्त नहीं
सुबह निकल जाते हैं कुछ सदस्य नए ठिकाने की तलाश में
राकेश शर्मा
सोलन।
दशकों से जिस घर में सुख और दुख बांटा आज वो घर अपने हाथों से तोड़ने पड़ रहे हैं। सुबह परिवार के कुछ सदस्य घरों की दीवारों को तोड़ने में व्यस्त रहते हैं तो कुछ नया ठिकाना ढूंढने निकल जाते हैं। विकास की बलि चढ़ रहे करीब 300 आशियानों के मालिकों के पास आंसु बहाने का अब वक्त नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं आखिर उन्हें अपना घर क्यों बदलना पड़ रहा है।
धर्मपुर के बाद चंबाघाट में फोरलेन कई परिवारों के लिए आंसु लेकर आया है। हालांकि यह परिवार विकास में बाधा नहीं बनना चाहते हैं। लेकिन कुछ और मोहलत जरूर प्रशासन से मांग रहे हैं ताकि नया ठिकाना ढूंढ सकें और सामान को भी समेट सकें। वर्षों तक जिस घर को अपना कहते रहे अब वहां यह 300 परिवार किरायेदार की तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। सुबह से शाम तक बस यही चर्चा है कि 24 के बाद क्या होगा। इस घड़ी सबसे दुखद क्षण यही है कि इनमें से कई लोगों को दूसरी जगह नहीं मिल पा रही है।
बड़े परिवारों पर मुसीबत का पहाड़ भी ज्यादा बड़ा टूटा है। सोलन शहर में दस हजार रुपये तक किराये पर फ्लैट मिल रहे हैं। लेकिन बेघर हो रहे परिवारों में से ज्यादातर इस स्थिति में नहीं हैं कि इतना किराया देकर आगे की जिंदगी गुजार सकें। बेघर होने की कगार पर पहुंचे एक परिवार की महिला कमलेश ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। एक बेटी नर्सरी में है जबकि बेटा छठी कक्षा में पढ़ता है। यह मकान उनके ससुर ने बनाया था। अब प्रशासन ने 24 तक इसे खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है। उनके पति रोजाना नया घर ढूंढनेे के लिए निकल रहे हैं। लेकिन किराया इतना ज्यादा है कि वे अब नया मकान शायद ही ले पाएं। प्रशासन को उन्हें थोड़ी मोहलत देनी चाहिए ताकि वे अपना इंतजाम कर सकें।