बद्दी (सोलन)। नगर परिषद में चेयरमैन के पद पर कब्जे को लेकर मचे घमासान के बीच भाजपा के पांचों पार्षद भूमिगत हो गए हैं।
नगर परिषद के कार्यालय में जहां प्रतिदिन चहल-पहल होती थी और लग्जरी गाड़ियां पार्किंग में लगी रहती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। परेशान जनता अपने कार्यों के लिए पार्षदों को ढूंढ रही है। लेकिन उनके मोबाइल भी बंद आ रहे हैं। सोशल मीडिया से भी पार्षद गायब हैं और फेसबुक भी अपडेट नहीं हो रही है। समझा जा रहा है कि सभी पार्षद अब 24 नवंबर को बहुमत साबित करने के लिए ही प्रकट होंगे।
नगर परिषद बद्दी के चेयरमैन का पद भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। करीब तीन वर्षों तक कांग्रेस के मदन चौधरी पांच पार्षदों के बहुमत के साथ इस पद पर विराजमान हैं, लेकिन उनके एक करीबी पार्षद नरेंद्र दीपा ने भाजपा से हाथ मिला लिया है। अब नरेंद्र दीपा भाजपा के चार पार्षदों की बदौलत चेयरमैन की दौड़ में शामिल हो गए हैं। नरेंद्र के भाजपा में आने से कांग्रेस अल्पमत में आ गई है, जिससे मदन चौधरी की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। दो दिन पहले ही भाजपा पार्षदों ने डीसी को मदन चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था और उस दिन से सभी पार्षद गायब हो गए हैं। भूमिगत हुए इन पार्षदों को शायद यह डर है कि पूर्व विधायक राम कुमार चौधरी और उनके बड़े भाई मदन लाल चौधरी किसी प्रकार उन्हें अपने साथ आने के लिए मना लेंगे। लेकिन दून के विधायक परमजीत सिंह पम्मी और जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष दर्शन सिंह सैणी यह कभी नहीं चाहेंगे कि नगर परिषद पर कब्जा जमाने के लिए मिले मौके को हाथ से गंवाया जाए। कांग्रेस से भाजपा में आए पार्षद नरेंद्र दीपा के अलावा भाजपा के चारों पार्षद संदीप सचदेवा, सुषमा कुंडलस, माया चौधरी और निर्मला ठाकुर बीते दो दिनों से भूमिगत हैं और परेशान जनता उन्हें ढूंढ रही है। पार्षदों के बगैर लोगों के कई जरूरी कार्य लटक गए हैं।
एसडीएम नालागढ़ प्रशांत देष्टा ने बताया कि 24 नवंबर को बैठक बुलाई गई है, जिसमें मदन चौधरी को बहुमत साबित करना होगा। अन्यथा उन्हें पद से हटना पड़ेगा। इस संबंध में सभी को जानकारी दे दी गई है।