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परवाणू उद्योग संघ पर भड़के ट्रक यूनियन ऑपरेटर, भेदभाव का आरोप

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के समक्ष उद्योगों के पलायन का ठीकरा ट्रक ऑपरेटरों पर फोड़ने से आक्रोश
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यूनियन का राजनीतिकरण बर्दाश्त नहीं : ऑपरेटर
अमर उजाला ब्यूरो
परवाणू (सोलन)।
औद्योगिक शहर परवाणू में ट्रक यूनियन और उद्योग संघ के बीच टकराव हो गया है। पिछले दिनों उद्योगों की समस्याओं को लेकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सहजल की अध्यक्षता में पीआईए (परवाणू उद्योग संघ) की बैठक हुई थी। यूनियन के मुताबिक इसमें उद्योग संघ के पदाधिकारियों ने ट्रक यूनियन को बंद करने की मांग कर डाली थी। इसमें तर्क दिया था कि ट्रक ऑपरेटरों की मनमानी से उद्योग चलाना मुश्किल हो गए हैं। इससे ट्रक ऑपरेटर भड़क गए हैं।
ट्रक यूनियन के सदस्य धर्मेश चंद, प्रकाश, घनश्याम कंवर, अजय सिंह, एलडी कुमार, लाली और अन्य ने कहा कि ऑपरेटरों ने उद्योगों को सुदृढ़ करने के लिए रात दिन एक किया है। आज ट्रक यूनियनों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीआईए की बैठक में 500 आपरेटरों का हवाला देकर यूनियन को बंद करने की मांग की थी। लेकिन पीआईए परवाणू यूनियन के तथ्यों से पूरी तरह से अनजान है। कहा कि परवाणू यूनियन में छोटे-बड़े लगभग 2000 मालवाहक वाहन काम कर रहे हैं। इनमें 2000 आपरेटर और करीब 1900 चालक तथा 1800 परिचालक हैं। 50 कर्मचारी यूनियन में काम कर रहे हैं। इसके साथ ही इन सभी लोगों के पीछे उनका पूरा परिवार चल रहा है। इनकी रोजी रोटी यूनियन से चल रही है।
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उन्होंने कहा कि यूनियन स्थानीय लोगों के लिए रोजी-रोटी का सबसे बड़ा साधन है। इसका राजनीतिकरण करना दुखदायक है। ट्रक यूनियन अगर उद्योगों के पलायन का कारण होता तो बीबीएनडीए आज विश्व के मानचित्र पर न होता। परवाणू यूनियन ही एकमात्र ऐसा यूनियन है जो लगभग 55 फीसदी एडवांस पर आल इंडिया में माल की सप्लाई दे आती है। उन्होंने कहा कि यूनियन होने से उद्योगों के सामान की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। आज तक एक भी घटना सामान चोरी की नहीं आई है। उन्होंने कहा कि यूनियन में अगर राजनीतिकरण करने की भावना से हस्तक्षेप किया गया तो यूनियन के लोगों को साथ लेकर सड़क पर उतर आएगी।
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