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बीएलओ का काम करने से आंगनबाड़ी वर्कर का इनकार

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एसडीएम से मिलती अांगनबाड़ी कायऱ्र्यकरता। - फोटो : अमर उजाला
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सोलन। आंगनबाड़ी वर्करों ने ड्यूटी के समय बीएलओ (बूथ लेबल ऑफिसर) की जिम्मेदारी निभाने से इनकार कर दिया है। निर्वाचन आयोग की तरफ से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर मताधिकार से जुड़ी जानकारी और नए वोट बनाने का काम सौंपा है। आंगनबाड़ी वर्कर को इसके एवज में एक साल में पांच हजार रुपये भत्ते के तौर पर मिलते हैं। लेकिन आंगनबाड़ी वर्कर ड्यूटी के समय को लेकर आहत हैं और वे इसमें बदलाव चाहती हैं। दरअसल, आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ताओं की ड्यूटी सुबह दस बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक होती है।
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बाल विकास विभाग ने निर्देश जारी कर तीन बजे के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वोट बनाने और मतदान जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होने तथा रोजाना के कार्यकलाप की अपडेट ऑनलाइन करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भड़क गई हैं। कार्यकर्ताओं की मांग है कि उन्हें सप्ताह में कुछ दिन तय कर सुबह दस से ड्यूटी समय तक ही यह काम करवाया जाए। इस दौरान आंगनबाड़ी को सहायक के हवाले रखें। इसके अलावा पांच हजार रुपये मेहनताने को बढ़ाने की भी मांग की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इस मांग को लेकर वीरवार को मिनी सचिवालय सोलन में एसडीएम आशुतोष गर्ग से मुलाकात की। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने एसडीएम से मांग की है कि वे उनकी इस समस्या को चुनाव आयोग के समक्ष रखें।

निर्वाचन अधिकारी के समक्ष रखेंगे मामला
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अदायगी को बढ़ाने की मांग कर रही हैं। समय में भी बदलाव चाहती हैं। इस मांग को निर्वाचन अधिकारी के समक्ष रखेंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूरे जिले में बीएलओ के तौर पर काम कर रही हैं। साथ ही उनकी जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्रों में भी है, उन्हें इस समय पांच हजार रुपये बीएलओ के तौर पर सेवा देने के एवज में मिल रहे हैं। इसे बढ़ाने का आग्रह निर्वाचन आयोग से किया जाएगा।
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