सोलन। सूखे खेत और मुरझा चुकी फसलें। धूल से भरे रास्ते और सड़कें। बारिश न होने से कुछ इस तरह का ही मंजर नजर आता है जिले के हर गांवों और शहरों में। खेतों में गेहूं का बीज कोपलें बनकर फूट चुका है लेकिन बारिश न होने से कोपलें अब पीली पड़ने लगी हैं। किसान और बागवान बारिश के इंतजार में है। कृषि और बागवानी बहुल इस जिले के लाखों परिवार कृषि पर निर्भर है। यहां अरबों रुपये की फसलें होती हैं। लेकिन बारिश न होने से इस बार सब तबाह होता नजर आ रहा है।
नवंबर, दिसंबर और जनवरी के महीने ग्यारह सालों से सूखे निकल रहे हैं। पिछले 11 सालों में सबसे सूखे रहे हैं। जिले में इससे पहले वर्ष 2007 में नवंबर और दिसंबर में सबसे कम 10 एमएम बारिश हुई थी। 2017 में जनवरी तक महज 08.6 एमएम और 2018 0.0 एमएम बारिश दर्ज की गई है। बारिश का इंतजार कर रहे किसानों सहित आम लोगों के माथे पर अब चिंता की लकीरें खींच चुकी हैं। सिंचाई के अभाव में नकदी पैदावार तबाह होने की कगार पर है। सोलन में कृषि आर्थिक स्थिति का मुख्य जरिया है। यहां के 80 फीसदी किसान परिवार कृषक हैं। बेहद सर्द माने जाने वाला माह दिसंबर बीत जाने के बाद जनवरी भी बीतने वाला है। लेकिन इस महीने एक बार भी बारिश नहीं हुई। मौसम में आए बदलाव के चलते प्राकृतिक जलस्रोत भी सूखने की कगार पर है। इससे गर्मियों में पानी की किल्लत होने की आशंका बढ़ गई है। दूसरी ओर जलजनित रोगों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। बारिश नही होने के चलते जिला शुष्क ठंड की प्रकोप में है। जिससे बीमारियों का अंदेशा भी पनपने लगा है और स्वास्थ्य विभाग ने अल्र्ट जारी किया है।
बारिश नहीं होने से नकदी फसलें मटर, प्याज, गेहूं, गोभी, सरसों, जवार, मेथी, गाजर, मूली, शलगम, धनिया और लहसुन आदि खराब होने की कगार पर है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इस वक्त बारिश की सबसे अधिक जरूरत है। अधिकांश क्षेत्रों में सिंचाई के लिए बारिश एक मात्र सहारा है। सोलन मंडी में हर साल नकदी फसलों का करीब 1200 करोड़ का कारोबार होता है। इसमें से अकेली रबी की फसलों से 170 करोड़ रुपये की होती हैं।
तीन माह में होती है बारिश कम
नौणी विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एसके भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल में करीब 10 से 11 सालों से मौसम का यह ट्रेंड चल रहा है। नवबंर दिसंबर और जनवरी को बारिश बहुत कम होती है। इसका मुख्य कारण यह रहता है कि हिमाचल में मानसून के दौरान 70 प्रतिशत बारिश हो जाती है। 30 फीसदी बारिश नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और अगस्त के माह में होती है। आने वाले दो दिन तक बारिश के कोई आसार नहीं है। मौसम शुष्क रहेगा। इस कारण किसानों की फसलों को कोहरे की मार झेलनी पड़ सकती है।
11 सालों में हुई वर्षा
(बारिश एमएम में रिकार्ड की गई)
साल नवंबर दिसंबर जनवरी
2007 -- 10 44.1
2008 5.4 5.7 21.3
2009 14.7 -- 11.5
2010 21.8 70.2 23.2
2011 -- 28.2 65.9
2012 3.9 18.4 113.6
2013 9.4 22.2 63.0
2014 -- 75.6 49.4
2015 7.6 18.8 4.0
2016 -- 8.6 122.2
2017 --- 2.4 19.4
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22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है खेती : ठाकुर
जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. आरएन ठाकुर ने बताया कि जिले में 22600 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बिजाई की जा चुकी है। इसमें 40600 हजार मीट्रिक टन बीज बोया गया है। एक सप्ताह तक और बारिश न हुई तो बीस से 25 फीसदी तक उत्पादन घट सकता है।