सोलन। परिवहन निगम द्वारा करोड़ों रुपये में खरीदी गईं लोअर फ्लोर बसें बेकार खड़ी हैं। जिले के तीन डिपो में यह बसें अरसे से शोपिस बनकर रह गई हैं। इन डिपो में करीब 38 बसें वर्कशॉप पर खड़ी हैं। आलम यह है कि कलस्टर के बाहर इन बसों के न चलने के बाद निगम इन्हें किसी अन्य रूटों पर नहीं चला रहा है। इसके चलते यह बसें धूल फांक रही हैं। जिला सोलन के तीन डिपों में करीब 38 से अधिक बसे खड़ी हैं।
जिला के तीन डिपों में से नालागढ़ में करीब 28 बसें और परवाणू तथा सोलन में 5-5 बसें वर्कशाप में खड़ी हैं। निगम द्वारा इन बसों को किसी भी रूट पर नहीं चलाया जा रहा है। आलम यह है कि कुछ महीनों पहले तीन डिपों में कलस्टर से बाहर के विभिन्न रूटों पर चलने वाली करीब 35 से अधिक नीली बसों पर रोक लग गई थी। जिसके बाद कलस्टर से बाहर चलने वाली लो लोर बसों को चलाना निगम ने बंद कर दिया है अब यह बसे केवल शोपिस बनकर वर्कशाप पर खड़ी हैं।
सोलन के तीन डिपो सोलन, नालागढ़ और परवाणू में यह बसे खड़ी हैं। जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन के तहत (जेएनएनयूआरएम) हिमाचल प्रदेश में 1200 से अधिक बसें खरीदी गईं थीं। योजना के तहत इन बसों को शहरों में ट्रैफिक की भीड़ को कम करने के लिए चलाया जाना था। यह बसें शहरों और इसके आसपास के निर्धारित क्षेत्रों (कलस्टर) में चलाई जा सकती हैं लेकिन एचआरटीसी ने इन बसों को दूरदराज और लंबे रूटों पर चलाना शुरू कर दिया। इसके बाद अब हाईकोर्ट ने इन बसों को कलस्टर से बाहर चलाने पर रोक लगा दी थी। अब इन बसों को निगम अब अन्य रूटों पर नहीं चला रहा जिस कारण दर्जनों बसें खड़ी हैं।
करोड़ों में है इन बसों की कीमत
एचआरटीसी द्वारा खरीदी लोअर फ्लोर बसों की कीमत भी लाखों में हैं। इसमें नौ मीटर लंबी बस बीस लाख और 12 मीटर लंबी बस 37 लाख रुपये में खरीदी गई है। जिले के तीन डिपों में खड़ी इन 38 बसों की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। हैरत इस बात की है कि अन्य जगह चलनी वाली बसों में अक्सर ओवरलोडिंग होती है। ऐसे में बेकार खड़ी इन बसों को इन रूटों पर चलाकर लोगों को राहत दिला जा सकती है।
बसों को चलाना मुश्किल : आरएम
क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेश धीमान ने बताया कि कलस्टर के बाहर लो फ्लोर बसों पर रोक लगने के बाद यह बसें खड़ी हैं। इसे किसी भी रूट पर चलाना फिलहाल मुश्किल है। उन्होंने कहा कि जैसे ही इस बारे में आगामी आदेश आएंगे बसों को चलाना शुरू कर दिया जाएगा।