प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने जांची बद्दी की डंपिंग साइट
24 को हाइकोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी रिपोर्ट
बीबीएनडीए के नाम है 43 बीघा जमीन, नप फेंक रही बददी से एकत्र कूड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
बद्दी (ब्यूरो)। नगर परिषद बद्दी के कचरे को निष्पादित करने के लिए बद्दी के निकट बनाई गई ठोस कचरा डंपिंग साइट का शिमला से आई एक टीम ने दौरा किया। इस टीम का नेतृत्व प्रदूषण बोर्ड के एसई प्रवीण कुमार गुप्ता ने किया। इसमें बीबीएन विकास प्राधिकरण के अलावा नगर परिषद के अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। बद्दी के निकट केंदूवाला में पूरे शहर का कचरा जाता है लेकिन कुछ स्थानीय लोगों ने प्रदूषण का हवाला देकर याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि नगर परिषद साइट के साथ उनकी निजी जमीन पर कूड़ा फेंकती है जिससे उनका जीना दूभर हो चुका है। इसके बाद कोर्ट ने उसकी करीब डेढ़ बीघा जमीन पर कूड़ा फेंकने पर रोक लगा दी थी।
जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में 43 बीघा जमीन बीबीएनडीए के नाम है जिस पर नप का कूड़ा फेंका जाता है। इसी मुद्दे को सुलझाने के लिए सोमवार को शिमला से आई टीम ने केंदूवाला कचरा प्लांट का दौरा किया और वहां का जायजा लिया। कमेटी ने पाया कि नगर परिषद अपने निर्धारित स्थान पर ही कूड़ा फेंकती है। स्थानीय लोगों को असुविधा न हो, इसके लिए कचरा प्लांट के विशेषज्ञों से राय लेकर इसे चला रही है। इसमें हर रोज दवाइयों का छिड़काव होता है। नप ने ठोस कचरा संयंत्र केंदूवाला में कचरा निष्पादन मशीनरी प्लांट लगाने के लिए प्रयासरत है और वर्तमान में कूड़े का सही निष्पादन हो रहा है। वहां जो मशीनरी लगनी है, उस कंपनी ने दो मशीनें ट्रायल के तौर पर सब्जी मंडी बद्दी में स्थापित कर दी हैं जो वेस्ट से कंपोस्ट बनाएगी। टीम ने उनका भी निरीक्षण किया।
नगर परिषद के कार्यवाहक कार्यकारी अधिकारी अजमेर सिंह ठाकुर ने बताया कि कूड़ा संयंत्र चलाने के लिए 16 करोड़ रुपये के टेंडर हो चुके हैं। इसमें एक टन कचरे को निष्पादन करने लिए 999 रुपये प्रति टन रेट तय हुआ है। इस टेंडर को मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलना बाकी है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी, इसका काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर परिषद के पास 43 बीघा अपनी जमीन है और नप को किसी की निजी जमीन में कूड़ा फेंकने की कोई जरूरत नहीं है।
एसई प्रवीण गुप्ता ने बताया कि इस मामले में व्यापक जानकारी जुटाई गई है। 24 अक्तूबर को कोर्ट में जवाब दिया जाएगा। सभी तथ्य विभागीय आला अधिकारियों को बताए जाएंगे।