सोलन। शिमला से चंडीगढ़ की दूरी कम करने के मकसद से बन रहे कालका-शिमला फोरलेन पर गाड़ी 40 से ज्यादा की स्पीड पर नहीं चल पाएगी। पहाड़ी सड़क होने की सूरत में नेशनल हाईवे अॅथारिटी ने फोरलेन पर 40 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड निर्धारित की है। यह पुराने हाईवे से दस किलोमीटर ज्यादा होगी। इससे पूर्व शिमला से चंडीगढ़ के बीच हाईवे पर विभागीय कागजों में टॉप स्पीड 30 निर्धारित की थी। इसे फोरलेन बनने के बाद दस किलोमीटर तक बढ़ाया जा रहा है।
निर्धारित स्पीड का अनुपालन वाहन चालकों को करना ही पड़ेगा। शिमला से परवाणू तक नेशनल हाईवे तीन किस्तों में तैयार होगा। इसमें परवाणू से चंबाघाट तक करीब 700 करोड़ रुपये से 40 किलोमीटर लंबे मार्ग का 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस मार्ग पर एक किलोमीटर लंबी सुरंग का भी निर्माण किया है। यह सुरंग चंडीगढ़ जाने वाले वाहनों की दूरी करीब छह किलोमीटर तक कम करेगी। फोरलेन के दूसरे चरण के लिए चंबाघाट से कैंथलीघाट तक टेंडर हो चुके हैं। इस मार्ग का निर्माण एरिफ इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और प्रकाश एसपाल्टिंट टॉल हाईवे मिलकर करेंगे। मार्ग में चंबाघाट और कंडाघाट में रेलवे क्रासिंग पर एक फ्लाई ओवर तथा कंडाघाट में ही करीब 400 मीटर लंबी एक सुरंग का निर्माण होगा। फोरलेन के इन प्रबंधों से शिमला से चंडीगढ़ के बीच की दूरी तो कम होगी लेकिन हाईवे के निर्माण की टॉप स्पीड से ज्यादा तेज गाड़ियां दौड़ाने वालों को नुकसान से बचना पड़ेगा।
910 दिन में पूरा करना होगा दूसरे चरण का काम
चंबाघाट से कैंथलीघाट तक फोरलेन के दूसरे चरण का काम कंपनी को 910 दिन में पूरा करना होगा। यह समयावधि ऐग्रीमेंट बनने के बाद शुरू हो जाएगी। टेंडर हासिल करने वाली कंपनी ने सोलन में मार्ग की टोह लेनी शुरू कर दी है। लेकिन ऐग्रीमेंट तभी तय होगा जब एनएचएआई प्रबंधन और प्रशासन मार्ग को पूरी तरह से खाली कर सभी कब्जे हटा देगा।
फोरलेन की चौड़ाई कई जगह 45 के बजाय कर दी 32 मीटर
शिमला-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे को फोरलेन में बदलने की कवायद का अंकगणित पूरी तरह से दुरुस्त नहीं है। तय मानकों के अनुसार फोरलेन का दायरा 45 मीटर का होना चाहिए। इसमें मध्य लाइन से दोनों तरफ को 22.50-22.50 मीटर क्षेत्र आना जरूरी है ताकि हाइवे के किनारे से संपर्क और पैदल मार्ग बनाए जा सकें। लेकिन चंबाघाट से परवाणू तक आधे बन चुके फोरलेन में इस नियम को पूरा नहीं किया है। हाईवे की कुल चौड़ाई कहीं 45 मीटर है तो कहीं यह सिकुड़ कर 32 मीटर ही रह गई है। इससे किनारे पर बनने वाले संपर्क मार्गों के लिए जगह ही नहीं बची है।
दूसरे चरण की औपचारिकताएं लगभग पूरी : स्वामी
एनएचआईए के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एके स्वामी ने कहा कि फोरलेन के दूसरे चरण की औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं। इसका निर्माण कंपनी को ऐग्रीमेंट होने के बाद 910 दिनों में पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि पहाड़ी सड़क होने की वजह से टॉप स्पीड का दायरा निर्धारित रहता है। पहले टॉप स्पीड 40 थी अब इसे 10 किलोमीटर प्रति घंटा तक और बढ़ाया जा सकता है।